नई लिंक रोड चालू होने पर ग्रेड सेपरेटर (फ्लाईओवर) के निर्माण के बाद ही जीटी रोड व मेरठ रोड पर ट्रैफिक स्मूथ हो पाएगा। जीडीए का दावा है कि ग्रेड सेपरेटर के लिए एनओसी को लेकर अब कोई ऑब्जेक्शन नहीं बचा है। सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और शीघ्र ही पर्यावरण मंत्रालय से जीडीए को एनओसी मिल जाएगी।
अगले तीन महीने में ग्रेड सेपरेटर बनकर तैयार हो जाएगा।जीडीए वीसी विजय कुमार यादव ने बताया कि एनओसी मामले में पर्यावरण मंत्रालय ने जिस मुद्दे पर आपत्ति जताई थी, उसका जवाब करीब दो माह पहले ही दे दिया गया था। मंत्रालय ने पुन: यही आपत्ति लगाकर जीडीए को पत्र भेजा।
अब मंत्रालय को यह बताया गया कि वह आपत्ति का जवाब अपने पहले के पत्र में दे चुका है। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि अगले एक पखवाडे़ में मंत्रालय से एनओसी मिल जाएगी। एनओसी मिलते ही ग्रेड सेपरेटर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।यह सेपरेटर मेरठ तिराहे से शुरू होकर साईं उपवन में नीचे उतर रहा है।
उपवन में करीब दो सौ मीटर क्षेत्र से गुजर कर सेपरेटर जीटी रोड से मिल जाएगा। सेपरेटर के लिए उपवन में 64 पेड काटने होंगे। वीसी ने बताया कि सेपरेटर का लगभग अस्सी प्रतिशत काम हो चुका है। अगले तीन महीने में सेपरेटर का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिसके बाद जीटी रोड व मेरठ रोड पर ट्रैफिक स्मूथ हो जाएगा।
फिलहाल नई लिंक रोड के ट्रैफिक के लिए जीटी रोड पर तत्कालिक तौर पर यूटर्न बना दिया गया है।बता दें कि जनवरी 14 में 16 करोड की लागत से ग्रेड सेपरेटर का निर्माण शुरू हुआ था।
जीटी रोड को नई लिंक रोड के ट्रैफिक के दबाव से बचाने के लिए सेपरेटर का निर्माण शुरू किया गया था ताकि मेरठ तिराहे पर ठाकुरद्वारा की तरफ से मोहननगर की ओर जाने वाला ट्रैफिक सेपरेटर से गुजर जाए।