लोन फर्जीवाड़े में छह बैंक अधिकारी एसआईटी के रडार पर
गाजियाबाद। कपड़ों पर प्रेस करने वाले लक्ष्य तंवर के साथ मिलकर 400 करोड़ से अधिक का लोन फर्जीवाड़ा करने वाले दो बैंक अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें पीएनबी की बर्खास्त लोन मैनेजर प्रियदर्शिनी कश्यप और बर्खास्त एजीएम रामनाथ मिश्रा हैं। इनके अलावा अभी छह बैंक अधिकारी भी एसआईटी की रडार पर हैं, जो फरार चल रहे हैं। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल का कहना है कि इन बैंक अधिकारियों में से अधिकांश ने फर्जीवाड़ा कर लोन पास किया, जबकि कुछ ने अपनी जिम्मेदारी न निभाते हुए फर्जीवाड़े में शामिल बैंक के दोषियों को बचाने का काम किया।
यह बैंक अधिकारी हैं फरार
- पीएनबी चंद्रनगर के पूर्व मैनेजर उत्कर्ष कुमार।
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर संजय तितरवे।
- पीएनबी लोहा मंडी के पूर्व मैनेजर दुर्गा प्रसाद।
- पीएनबी चंद्रनगर के पूर्व लोन मैनेजर तारिक हुसैन।
- पीएनबी की आरएबी शाखा के पूर्व लोन मैनेजर प्रेमचंद।
- पीएनबी के पूर्व मैनेजर अनुपम सहाय।
हर बैंक अधिकारी 2 से 10 मुकदमों में नामजद
लोन फर्जीवाड़े में लक्ष्य तंवर पर 39 मुकदमे दर्ज हैं। फरार चल रहे बैंक अधिकारी 2 से लेकर 10 मुकदमों में नामजद हैं। इनमें से संजय तितरवे बर्खास्त हो चुका है। एसपी सिटी का कहना है कि सभी बैंक अधिकारियों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन वह फरार चल रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए अब इनके परिजनों पर शिकंजा कसा जाएगा।
कुर्की की दो फाइल भेजीं, एसएसपी ने दोनों लौटाईं
एसपी सिटी ने बताया कि सभी मुकदमों में नामजद आरोपियों की संपत्ति की जांच के दौरान उनके नाम पर 29 वाहन रजिस्टर्ड मिले। इनमें से 18 वाहन ऐसे मिले जो फर्जीवाड़े की रकम से खरीदे गए। इन्हें कुर्क करने के लिए एसएसपी को फाइल भेजी गई थी। साथ ही 21 संपत्तियों को चिन्हित कर उनमें से दो को कुर्क करने की फाइल भी भेजी गई थी। एसएसपी ने कुछ बिंदु स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए फाइल वापस कर दी है। दो से तीन दिन में बिंदु स्पष्ट कर फाइल पुन: प्रेषित कर दी जाएगी।
पुलिस ने जांच में शामिल की यह संपत्ति
(लक्ष्य तंवर के नाम)
- 2012 में चिरंजीव विहार में खरीदी 50 लाख की संपत्ति।
(लक्ष्य के पिता अशोक के नाम)
- 2012 में चिरंजीव विहार में खरीदी 50 लाख की संपत्ति।
- 2015 में शालीमार गार्डन में खरीदी 47 लाख की संपत्ति।
(लक्ष्य की मां रेनू देवी के नाम)
- 2016 में दादरी में खरीदा 15.85 लाख का प्लॉट।
- 2016 में शालीमार गार्डन में खरीदी 42 लाख की संपत्ति।
- 2015 में तुराबनगर में खरीदी 47.67 लाख की संपत्ति।
- 2019 में तुराबनगर में खरीदी 17.67 लाख की संपत्ति।
(लक्ष्य की पत्नी प्रियंका के नाम)
- 2015 में वैशाली में खरीदी 90 लाख की संपत्ति।
- 2015 में राजनगर में खरीदी 18 लाख की संपत्ति।
- 2015 में कविनगर में खरीदी 90 लाख की संपत्ति।
- 2015 में कविनगर में खरीदी 13 लाख की संपत्ति।
- 2015 वैभव खंड इंदिरापुरम में खरीदी 1 करोड़ की संपत्ति।
- 2016 में शालीमार गार्डन में खरीदी 28 लाख की संपत्ति
- 2018 को गंगापुरम में खरीदा 70.20 लाख का प्लॉट।
- 2019 को अशोक नगर बी-ब्लॉक में खरीदी 2 करोड़ की संपत्ति।
(लक्ष्य के नौकरों के नाम)
- 2016 में नौकर अजय पुरोहित के नाम वैैशाली में खरीदी 70.65 लाख की संपत्ति।
- 2016 में आरडीसी में खरीदी 50 लाख की संपत्ति।
(लक्ष्य की मुंहबोली मां के नाम)
- 2014 में नेहरू नगर में 2 करोड़ की संपत्ति खरीदी, जिस पर डेढ़ करोड़ का लोन लिया।
इनसेट......
सवा 7 करोड़ की सात संपत्तियां परिचितों के नाम
एसआईटी की जांच में करीब सवा 7 करोड़ की सात संपत्तियां ऐसी मिली हैं, जिनमें फर्जीवाड़े की रकम निवेश हुई। लेकिन यह संपत्तियां लक्ष्य तंवर या उसके परिजनों की बजाय लक्ष्य तंवर के परिचितों के नाम पर हैं। यह संपत्तियां तुराबनगर, पटेल नगर और सिहानी मार्केट में हैं। पुलिस इन संपत्तियों के मालिकों से आय का स्रोत जानेगी।