मुरादनगर विधानसभा सीट पर हुई सबकी मुराद पूरी
गाजियाबाद। आजादी के 20 साल बाद अस्तित्व में आई मुरादनगर विधानसभा सीट का अलग मिजाज रहा है। इस क्षेत्र के वोटरों ने किसी दल को नाराज नहीं किया। यह ऐसी सीट है जहां कांग्रेस, समाजवादी पाटी, बसपा, भाजपा के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी नेताओं ने जीत हासिल कर विधानसभा तक का सफर तय किया है।
इस विधानसभा सीट पर सबसे पहले जीएस चौधरी विधायक बने। स्थानीय लोग बताते हैं कि न कोई शोरशराबा न पैसों की बर्बादी। बेहद सादगी पूर्ण हुए पहले विधानसभा चुनाव में महज 15951 वोट पाकर जीएस चौधरी विधायक बने थे। वह लगभग 2900 वोटों से जीते थे। मुरादनगर सीट पर पहले से त्यागी, मुस्लिम और जाट समीकरण रहा है। इस समीकरण को जिसने बेहतर तरीके से साध लिया, उसी प्रत्याशी ने जीत पाई। पहले चुनाव में जीत हासिल करने वाले जीएस चौधरी इससे अगले ही चुनाव में तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। 1969 में बीकेडी के टिकट पर ईश्वर दयाल ने जीत हासिल की। इस सीट पर सबसे ज्यादा चार बार कांग्रेस प्रत्याशी जीते। सपा, बसपा और भाजपा के खाते में यह सीट एक-एक बार रही। समाजवादी पार्टी जहां जिले की अन्य किसी सीट पर खाता नहीं खोल पाई, मुरादनगर सीट पर 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर राजपाल त्यागी ने यहां से जीत हासिल की थी। चार प्रमुख दलों के अलावा बीकेडी, आरपीआई, जेएनपी, एलकेडी और जनता दल के प्रत्याशियों ने भी यहां जीत हासिल की है।
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6 बार राजपाल त्यागी, एक बार बेटे अजीत बने विधायक
मुरादनगर विधानसभा सीट पर पूर्व मंत्री राजपाल त्यागी और उनके परिवार का दबदबा रहा है। राजपाल त्यागी अलग-अलग दलों के टिकट पर यहां से 6 बार विधायक रहे। क्षेत्र की जनता से जुड़ाव और अपने विकास कार्यों के दम पर जनता ने उन्हें पांच आम विधानसभा चुनाव में एक बार उपचुनाव में जिता कर विधानसभा में भेजा। वह दो बार निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते थे। वर्ष 2007 में राजपाल त्यागी निर्दलीय चुनाव जीते थे। प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय विधायक पद से इस्तीफा दिया और 2008 में उपचुनाव में फिर बसपा से चुनाव लड़कर जीते।
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राम मंदिर लहर में हारी, मोदी लहर में जीती भाजपा
वर्ष 1991 में राम मंदिर लहर में भी भाजपा मुरादनगर विधानसभा सीट पर जीत का परचम नहीं लहरा पाई थी। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे राजपाल त्यागी ने भाजपा के प्रत्याशी केशव त्यागी को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। जबकि इस राम मंदिर लहर में गाजियाबाद सीट पर भाजपा के बालेश्वर त्यागी ने जीत हासिल की थी। मुरादनगर सीट पर भाजपा ने पहली बार मोदी लहर में 2017 में जीत हासिल की। पूर्व मंत्री राजपाल त्यागी के बेटे अजीत पाल त्यागी ने भाजपा के टिकट पर यहां चुनाव लड़ा और जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे।
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अब एमवाईजे बड़ा फैक्टर
इस बार मुरादनगर विधानसभा सीट पर एमवाईजे (मुस्लिम-यादव और जाट) का यहां बड़ा फैक्टर होगा। सपा के साथ गठबंधन कर रालोद इस फैक्टर को साधने की कोशिश करेगी। गठबंधन में यह सीट रालोद के खाते में जा सकती है। वहीं भाजपा अपनी जीत को दोहराने का पूरा प्रयास करेगी। इस सीट पर ऐसे शहरी वोटरों की बड़ी संख्या है जो भाजपा का कैडर वोट माना जाता है।
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ऐसे बदलते रहे मुरादनगर के विधायक
वर्ष विधायक बने पार्टी
1967 जीएस चौधरी निर्दलीय
1969 ईश्वर दयाल बीकेडी
1974 राजपाल कांग्रेस
1977 अनवर जेएनपी
1980 ईश्वर दयाल त्यागी कांग्रेस (आई)
1985 सखावत हुसैन एलकेडी
1989 राजपाल त्यागी निर्दलीय
1991 राजपाल त्यागी कांग्रेस
1993 प्रेम सिंह जनता दल
1996 राजपाल त्यागी सपा
2002 राजपाल त्यागी कांग्रेस
2007 राजपाल त्यागी निर्दलीय
2012 वहाब चौधरी बसपा
2017 अजीतपाल त्यागी भाजपा