सात महीने बाद कुर्की की अर्जी दी, वह भी गलतियों से भरी
गाजियाबाद। नरेश त्यागी हत्याकांड में विधायक के आरोपी भाई गिरीश पाल त्यागी पर मेहरबानी को लेकर सवालों के घेरे में आई पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। मृतक के परिजनों द्वारा मोर्चा खोलने के बाद पुलिस ने सात महीने बाद गिरीश पाल त्यागी की कुर्की की अर्जी लगाई, लेकिन उसमें भी तमाम गलतियां कर दीं। जिसके चलते कुर्की की अर्जी कोर्ट से लौट आई। पुलिस अब विधिक राय लेकर दोबारा से कुर्की की अर्जी लगाएगी।
पिछले साल 9 सितंबर को लोहिया नहर में भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने खुलासा किया था कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही मामा की हत्या का षड्यंत्र रचा था। 13 महीने में पुलिस न तो गिरीश को गिरफ्तार कर सकी और न ही उस पर इनाम ही घोषित किया। मंगलवार को नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने प्रेसवार्ता कर पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 मार्च को कुर्की की अधिसूचना का नोटिस प्राप्त करने के सात महीने बाद भी पुलिस ने कुर्की की कार्रवाई नहीं की, जो कि एक महीने बाद ही हो जानी चाहिए थी।
आपत्ति लगाकर पुलिस को लौटाई कुर्की की अर्जी
फजीहत होती देख सिहानी गेट पुलिस ने आनन-फानन गिरीश पाल त्यागी की कुर्की की अर्जी कोर्ट में दाखिल कर दी, लेकिन उसमें कई खामियां छोड़ दीं। जिसके चलते कोर्ट ने उस पर आपत्ति लगाते हुए लौटा दिया। मामले की विवेचना कर रहे सिहानी गेट एसएचओ देवपाल पुंडीर का कहना है कि कोर्ट ने कुछ कमियां बताकर फाइल लौटा दी है। उन कमियों को पूरा कर दोबारा से कुर्की की अर्जी लगाई जाएगी।
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वकील ने भी जान का खतरा बता अफसरों से मांगी सुरक्षा
गाजियाबाद। तीन दिन पहले प्रेसवार्ता कर नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने फरार चल रहे गिरीश पाल त्यागी द्वारा अपनी हत्या का अंदेशा जताया था। इसी कड़ी में अब केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने जान का खतरा बता अफसरों से सुरक्षा मांगी है। उन्होंने अपनी सुरक्षा में एक सुरक्षाकर्मी तैनात करने की मांग की है।
मनोज नागवंशी का कहना है कि वह नरेश त्यागी हत्याकांड में वादी की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। हत्या का मुख्य षड्यंत्रकारी गिरीश पाल त्यागी एक साल बाद भी फरार है। गिरीश के पिता राजपाल त्यागी पूर्व केबिनेट मंत्री हैं और भाई अजीत पाल त्यागी सत्ता पक्ष के विधायक हैं। वहीं, शूटर व असलहा मुहैया कराने वाला जितेंद्र त्यागी भी जमानत पर बाहर आ गया है। जितेंद्र त्यागी का आपराधिक इतिहास है। मनोज नागवंशी का कहना है कि खतरे को देखते हुए मृतक के बेटे अभिषेक त्यागी व भाई नवीन त्यागी को एक-एक सुरक्षाकर्मी मुहैया कराया गया है। दहशत में वादी ने अपना घर भी छोड़ दिया है। अधिवक्ता ने दलील दी है कि मुकदमे की पैरवी रोकने के लिए गिरीश त्यागी और जितेंद्र त्यागी उन पर शार्प शूटरों से हमला कर सकते हैं। लिहाजा उन्हें भी सुरक्षाकर्मी मुहैया कराया जाए।
डीएम ने एलआईयू से मंगाई रिपोर्ट
अधिवक्ता मनोज नागवंशी का कहना है कि उन्होंने डीएम से मिलकर सुरक्षा की मांग की है। डीएम ने उन्हें आश्वासन दिया है। इसके लिए उन्होंने एलआईयू (अभिसूचना इकाई) से रिपोर्ट मंगाने के निर्देश दिए हैं। मनोज नागवंशी का कहना है कि उनके साथ कोई घटना होती है तो उसके जिम्मेदार गिरीश पाल त्यागी और जितेंद्र त्यागी होंगे।