तकनीक पर खर्च किए 130 करोड़ फिर भी नहीं रुकी बिजली चोरी
गाजियाबाद। विद्युत निगम ने जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए तकनीक पर 130 करोड़ रुपये खर्च कर दिए फिर भी हर महीने 64 करोड़ की बिजली चोरी की जा रही है। बिजली चोरी करने में उद्योगों से आगे ग्रामीण क्षेत्र है। विभाग के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक 29 फीसदी लाइन लॉस है।
बिजली चोरी रोकने के लिए विद्युत निगम ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ट्रांसफार्मर पर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) मीटर लगाए हैं। जिले के करीब 28 हजार ट्रांसफार्मर पर इन मीटर को लगाने का कार्य जुलाई से चल रहा है। 70 फीसदी कार्य विद्युत निगम ने पूरा कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर से सप्लाई होने वाली आपूर्ति का सटीक डाटा अधिकारियों के पास रहेगा। इस तकनीक की मदद से ट्रांसफार्मर से जुडे़ कनेक्शन की बिजली खपत का पता चल सकेगा। इसके अलावा बिजली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी के लिए भी सभी उपकेंद्रों पर रियल टाइम डाटा एक्विजेशन सिस्टम (आरटीडास) लगाए गए हैं। इन उपकेंद्रों को विद्युत निगम के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, जहां से बिजलीघरों से होने वाली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। आरटीडास लगाने का कार्य जिले में पूरा हो गया है। इन दोनाें ही तकनीक पर निगम ने लगभग 130 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
जिले में हर महीने 64 करोड़ की बिजली चोरी :
विद्युत निगम को हर महीने बिजली चोरी से 64 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिले का लाइन लॉस 16 फीसदी है। विद्युत निगम के अधिकारियों के मुताबिक शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक बिजली चोरी है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हर महीने 18.56 लाख की बिजली चोरी हो रही है।
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जिले में हर महीने बिजली की खरीद - 646 मिलियन यूनिट
हर दिन खपत - 20 मिलियन यूनिट
हर महीने राजस्व - 400 से 425 करोड़ रुपये
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दिवाली के तीन दिन 25 फीसदी बढ़ेगी मांग :
दिवाली पर बिजली की मांग 25 फीसदी तक बढ़ जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक धनतेरस से लेकर दिवाली तक तीन दिन मांग अधिक रहेगी। जिले में 1500 से 2000 मेगावाट की क्षमता है, जिससे लोगों को परेशानी नहीं होगी।
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लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर में ज्यादा चोरी
बिजली चोरी की सबसे अधिक शिकायतें लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर से हैं। इन क्षेत्रों में रोकथाम के लिए प्राथमिकता पर तकनीक का प्रयोग किया गया है। डीटी मीटर लगाने की शुरुआत जिले के निवाड़ी गांव से की गई। तीन महीने में इन क्षेत्रों में बिजली चोरी पकड़ में आने के बाद कार्रवाई की गई है।
- शुचींद्र कुमार पुरवार, मुख्य अभियंता
विद्युत निगम