हर साल पांच करोड़ का बजट पास
फिर भी मलिन बस्तियों में नहीं विकास
गाजियाबाद। मलिन बस्तियों में विकास कार्य अब सिर्फ कागजों में हो रहे हैं। नगर निगम हर साल इन बस्तियों के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट पास करता है, लेकिन प्रत्येक वर्ष बिना खर्च किए ही यह शून्य हो जाता है। मलिन बस्तियों के लोग और पार्षद विकास कार्यों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी इस बजट को खर्च करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। नगर निगम बजट के पिछले पांच साल के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि निगम ने मलिन बस्तियों के बजट में से एक रुपया भी खर्च नहीं किया, जबकि यहां समस्याओं का अंबार है।
बसपा के शासनकाल में मलिन बस्तियों के विकास की अलग कार्ययोजना बनाई गई थी। इनमें सड़क, सीवर, पानी की सुविधा के लिए नगर निगम ने भी हर साल अलग बजट देना शुरू किया था। नगर निगम ने निर्माण विभाग और जलकल विभाग को हर साल 5-5 करोड़ रुपये इन बस्तियों में खर्च करने के लिए दिया, लेकिन सत्ता बदली तो निगम की प्राथमिकताएं भी बदल गईं। यह बजट दिया तो अभी भी जाता है, लेकिन न तो मलिन बस्तियों के लिए अलग से प्रस्ताव दिए जाते हैं और न ही इस बजट को खर्च किया जा रहा। मलिन बस्तियों के लोग और इनका प्रतिनिधित्व करने वाले पार्षद हर साल इस बजट से विकास कार्य कराए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन साल के अंत में बजट बिना खर्च किए शून्य हो जाता है।
इसलिए दिया गया था अलग बजट
वार्ड कोटे का 80 फीसदी बजट बड़ी कॉलोनियों में विकास कार्यों पर ही खर्च हो जाता है। मलिन बस्तियों की समस्याएं जस की तस रह जाती हैं। इसकी वजह से नगर निगम ने इन बस्तियों के लिए अलग बजट पास करने का प्रावधान किया था, ताकि इनके बजट का बंटवारा अन्य कॉलोनियों में न हो सके।
निर्माण विभाग के आंकड़े
वर्ष पास किया गया बजट खर्च की गई धनराशि
2017-18 5 करोड़ शून्य
2018-19 2 करोड़ शून्य
2019-20 5 करोड़ शून्य
2020-21 5 करोड़ शून्य
2021-22 5 करोड़ अभी तक शून्य
जलकल विभाग भी पूरा खर्च न कर पाया बजट
जलकल मलिन बस्ती के लिए मिले 5 करोड़ के बजट में से वर्ष 2017-18 में 2.92 करोड़ रुपये, 2018-19 में 1.48 करोड़ रुपये, 2019-20 में 1.39 करोड़, 2020-21 में सिर्फ 2.72 लाख रुपये खर्च कर पाया। जबकि हर साल पांच करोड़ रुपये का बजट दिया गया था।
मार्च तक निर्माण कराए जाएंगे
कई साल से मलिन बस्तियों के बजट को खर्च नहीं किया जा रहा था। हमने समीक्षा की और इस फंड से मलिन बस्तियों के लिए कार्ययोजना बनवाई। निर्माण विभाग से अभी तक करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके। मार्च तक पूरा बजट खर्च कर निर्माण कार्य कराए जाएंगे।
- महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त