न सैनिटाइजेशन न थर्मल स्क्रीनिंग, खोल दिए स्कूल
गाजियाबाद। बिना सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग के कक्षा छह से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियोें के स्कूल खुल गए हैं। डर और आशंका के माहौल के बीच यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। सरकारी स्कूलों में बचाव और पहचान के इंतजाम न के बराबर दिखे। निजी स्कूल इस मामले में बेहतर हैं। वहां इंतजाम हैं तो पहले दिन बच्चों की संख्या गिनी-चुनी रही। परिषदीय स्कूलों में करीब 15 प्रतिशत विद्यार्थी पहुंचे।
12वीं तक के स्कूल 16 अगस्त को खुल चुके हैं। अब 24 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक के स्कूलों को खोला गया। इसमें सबसे ज्यादा 190 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने स्कूल खोलने के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन विद्यालयों को सैनिटाइजेशन नहीं कराया गया। अधिकतर विद्यालयों में थर्मल स्क्रीनिंग उपकरण नहीं है। ऐसे में अगर किसी बच्चे को बुखार है तो उसे चेक नहीं किया जा सकता। स्कूल इसकी मांग कर रहे हैं।
40 हजार हैं विद्यार्थी
कक्षा छह से आठ तक के परिषदीय स्कूलों में 40 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। मंगलवार को करीब छह हजार छात्र-छात्राएं ही स्कूल पहुंचे। 85 फीसदी अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। किसी स्कूल में तो एक दो बच्चे ही पहुंचे। अभिभावकों ने कहा कि छोटे बच्चों को वह स्कूल नहीं भेजेंगे। कोरोना का खतरा बढ़ गया है।
कोरोना की स्थिति को देखते हुए नहीं खोले स्कूल
हमने अन्य प्रदेश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए छोटे बच्चों की ऑफलाइन कक्षाओं को संचालित नहीं किया है। उनके लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही है। अभिभावक भी बच्चों को भेजने के लिए सहमत नहीं है। जब तक अभिभावक बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं होंगे। स्कूल खोलना संभव नहीं है। 10 से 12 तक की कक्षाएं चल रही हैं।
ज्योति गुप्ता, नोडल अधिकारी सीबीएसई
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केंद्रीय मंत्री को लिखा है पत्र, स्कूल खोलना पड़ेगा भारी
सरकार का कोरोना की तीसरी लहर आने की चेतावनी को अनदेखा कर स्कूल खोलने का निर्णय अभिभावकों पर भारी पड़ सकता है। सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना है। जिसे बच्चों के लिए सबसे खतरनाक बताया जा रहा है। सरकार स्कूलों के हित के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। स्कूल न खोले जाएं इसके लिए केंद्रीय शिक्षामंत्री को पत्र भी लिखा है।
सीमा त्यागी, अध्यक्ष गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन
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मांग के बाद भी नहीं हुआ सेनिटाइजेशन
विभाग और प्रशासन से मांग की थी कि विद्यालयों में सैनिटाइजेशन कराया जाए, लेकिन न तो सैनिटाइजेशन कराया गया और न ही थर्मल स्क्रीनिंग के उपकरण की व्यवस्था कराई गई। ग्राम पंचायतों को सैनिटाइजेशन कराना था। जो कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी नहीं हुआ है। सैनिटाइजेशन कराकर ग्राम पंचायतों से प्रमाण पत्र लिए जाएं। नहीं तो शिक्षक और बच्चे दोनों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
डा. अनुज त्यागी, प्रांतीय उपाध्यक्ष