आग से मरने वाली गायों की संख्या हुई 40
इंदिरापुरम। कनावनी गांव में आग लगने की घटना में दो और गायों की मौत हो गई। अब मरने वाली गायों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। 15 घायल गायों का इलाज चल रहा है। सौ से अधिक गायों वाली इस गौशाला में अब 25 गाय बच गई हैं। आग के दौरान जो गायें भाग गईं थीं, वह वापस गौशाला में नहीं लौटीं। मंगलवार को दिनभर अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक का गौशाला में आना जाना लगा रहा। प्रशासन की टीम मौके से मलबा हटाने में जुटी रही। श्री कृष्ण सेवा गऊशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष सूरज पंडित ने बताया कि आग लगने से झुलसी गायों में से एक गाय की सोमवार रात और दूसरी गांव की मंगलवार सुबह मौत हो गई। ट्रस्ट के लोगों ने जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर गायों का विधिवत रूप से अंतिम संस्कार किया। उनकी आत्मा की शांति के लिए हवन भी कराया गया। नगर निगम ने एक घायल गाय को इलाज के लिए दादरी के एक अस्पताल में भेजा है। अन्य घायल गायों का उपचार चिकित्सकों की एक टीम कर रही है। गोवंशों की स्थिति जानने के लिए मंगलवार दोपहर पशु विभाग के एडिशनल डायरेक्टर बृजवीर सिंह गौशाला पहुंचे। उन्होंने गौशाला का निरीक्षण करते हुए घायल गायों का बेहतर उपचार करने के निर्देश दिए। सूरज पंडित ने बताया कि गौशाला करीब 3 साल से चल रही थी। वह सड़कों पर आवारा घूम रही गायों को गौशाला में लाते थे और उनकी देखरेख करते थे। उनकी गौशाला में 100 से अधिक गायें थीं। आग लगने पर 40 गाय की मौत हो चुकी है। करीब 25 गाय उनके पास है। आग लगने के दौरान जो गायें भाग गईं थीं, पता नहीं वह अभी किस हाल में कहां होगी।
झुग्गी वालों से लिया जा रहा था किराया
स्थानीय लोगों के बीच जमीन का मालिक दिल्ली का होने व जमीन को किराए पर देने की भी चर्चा रही। अर्थला के कुछ लोग जमीन को किराए पर लेकर कबाड़ का काम करते थे। वहीं गौशाला निर्माण होने तक गोवंशों को झुग्गियों की जमीन पर रखने की भी तैयारी होती दिखी। जिससे गोवंशों को धूप व गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके। इसको लेकर मौके पर हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी पहुंचते रहे।