गाजियाबाद : यूपी गेट बार्डर पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से तीसरे दिन भी इक्का दुक्का वाहन ही दिल्
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बॉर्डर से जबरन किसानों को हटाया तो देश के दफ्तरों को बना देंगे गल्ला मंडी : टिकैत
कौशांबी (गाजियाबाद)। यूपी गेट पर किसान आंदोलन स्थल के पास से सीमेंटेड व लोहे के बैरिकेड व कंटीले तार हटने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार को चेताया है। उन्होंने रविवार सुबह ट्वीट कर कहा कि किसानों को अगर बॉर्डर से जबरन हटाने की कोशिश हुई तो देशभर में सरकारी दफ्तरों को गल्ला मंडी बना देंगे। उन्हें अंदेशा है कि किसी साजिश के तहत बिना मांगे माने किसानों को जबरन हटाया जा सकता है। वहीं, एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर तीसरे दिन भी एंबुलेंस और चार पहिया छोटे वाहन ही निकल पाए।
भाकियू के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसान आंदोलन में यथावत स्थिति बनी रहेगी। जब तक सरकार किसानों की मांगों को नहीं मानती है, तब तक देश का अन्नदाता सड़कों पर बैठकर सरकार के निर्णय का इंतजार करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले कई दिनों से किसानों के खिलाफ साजिश रच रही है। हर मोर्चे ने इन साजिशों को नाकाम किया है, लेकिन ऐसी साजिशों से किसान आंदोलन का समाधान नहीं निकलने वाला है। उन्होंने अंदेशा जताया कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। सरकार बातचीत से समाधान नहीं करना चाहती है। बल्कि साजिश से किसानों को हटाना चाहती है। तमाम तरह की घटनाओं ने साजिशों को खोल दिया है। धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि ऐसे हालात को देखते हुए 6 नवंबर को सिंघु बॉर्डर पर किसान नेताओं की बैठक होगी। इसमें आगे की रणनीति बनेगी। क्योंकि अभी किसान नेता अलग-अलग मोर्चे पर लोगों से बात कर रहे हैं। भाकियू जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि आंदोलन स्थल पर अब किसानों का तादाद बढ़ने लगी है। दो दिनों में मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ के किसान अपने ट्रैक्टर व वाहनों से पहुंचे। वहीं, रविवार को सभी ने आंदोलन के मंच पर भारत के पहले गृहमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की तस्वीर पर माल्यार्पण कर नमन किया।
किसान चिंतक सरदार पटेल को दी श्रद्धांजल
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर भी किसान नेता राकेश टिकैत सरकार पर हमलावर हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पटेल की जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित कर लिखा कि गुलाम भारत में सरकार पटेल कहते रहे कि ‘किसानों की आवाज अनसुनी है’ पर क्या आजाद भारत में भी देश के किसानों की आवाज सुनी जा रही है। किसानों की ओर से जयंती पर किसान चिंतक सरदार पटेल को विनम्र श्रद्धांजलि।