हवा की सेहत बिगड़ी...लोगों की सांस फूली
साहिबाबाद। दशानन दहन के अगले दिन शनिवार को शहर में हवा की सेहत अचानक बिगड़ जाने से लोगों का दम फूल गया। तापमान के उतार-चढ़ाव वाले इस सीजन में प्रदूषण का यह पहला हमला था। दिन भर धुंध की चादर तनी रही। सूक्ष्म कणों और धूल कणों के बढ़ जाने से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और अस्थमा रोगियों को हुई। अस्पतालों में 20 फीसदी मरीज आंखों में चुभन, सीने में जलन और सांस फूलने के आए। रेड जोन में पहुंचे शहर में सबसे ज्यादा जहर वसुंधरा की हवा में मिला। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक ( एक्यूआई) 359 दर्ज किया गया।
?प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से समझा जा सकता है कि हवा में जहर कितनी तेजी से बढ़कर सांसों पर संकट बना है। 15अक्तूबर को सुबह दस बजे इंदिरापुरम में एक्यूआई 190 था। शनिवार की सुबह 10 बजे 317 पर पहुंच गया। लोनी में 251 से बढ़कर 327, वसुंधरा 211 से 332 पहुंच गया। शाम पांच बजे इंदिरापुरम में 350, लोनी में 374,वसुंधरा में 359 रहा। सभी जगह धूल कण और सूक्ष्म कण मानक से चार से पांच गुना तक बढ़ गए।
20 फीसदी मरीज सांस के आए
जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में शनिवार को 20 फीसदी मरीज सांस संबंधी बीमारी के रहे। फिजिशियन डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मरीज इस सीजन में पहली बार आए थे। इनमें गर्भवती महिलाएं, अस्थमा के रोगी, बुजुर्गों की संख्या ज्यादा थी। महिलाओं को उल्टी और बेचैनी की शिकायत भी थी ।
धुआं रोकने के उपाय न धूल नियंत्रण के
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने ज्यादा प्रदूषण वाले आवासीय क्षेत्रों को हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित तो कर लिया, लेकिन हवा में जहर घुलने से रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए। संजय नगर इन हॉट स्पॉट में शामिल है। यहां भी प्रदूषण का स्तर रेड जोन में पहुंच गया है।
यहां सुबह दस बजे एक्यूआई 292 था जो शाम पांच बजे 334 पर पहुंच गया। वाहनों के धुएं से फैलने वाले पीएम 10 कण 437 रहे। धूल के कण पीएम 2.5 480 पर रहे। दोनों मानक से कई गुना ज्यादा हैं।
सांसों पर संकट
इलाका एक्यूआई
इंदिरापुरम 350
लोनी 374
वसुंधरा 359
संजय नगर 334
आठ दिन से येलो से रेड जोन में
8 अक्तूबर 194 येलो
9 अक्तूबर 235 ऑरेंज
10 अक्तूबर 222 ऑरेंज
11 अक्तूबर 225 ऑरेंज
12 अक्तूबर 190 येलो
13 अक्तूबर 223 ऑरेंज
14 अक्तूबर 223 ऑरेंज
15 अक्तूबर 235 ऑरेंज
16 अक्तूबर 349 रेड
मास्क लगाकर ही घर से निकलें
1. सुबह और शाम प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहता है। इस दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।
2. घर से बाहर मास्क लगाकर ही निकलें, ये प्रदूषण और कोरोना दोनों से बचाएगा।
3. बाहर से घर आने पर स्नान करें, धूल के कण शरीर पर चिपक जाते हैं, नहाने से ये धुल जाते हैं।
क्या बोले लोग
मैं हर रोज सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकलती हूं, आदतन शनिवार की सुबह भी निकली लेकिन बाहर निकलते हुए धुंध सी दिखाई दी। इसके साथ ही आंखें में कुछ चुभने लगा था, परेशानी की वजह से मैं जल्द ही घर लौट आई।
किरण श्रीवास्तव,
मैं सुबह जब अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए निकला तो वायुमंडल में धुंधलापन था। यह प्रदूषण है मैं समझ गया था हालांकि इस बार तो रावण भी पहले के मुकाबले बहुत कम जगह जले फिर भी इस तरह प्रदूषण बढ़ा है, यह चिंता की बाद है।
आमोद झा
आए दिन गाजियबाद प्रदूषण के मामले में अव्वल रहता है, बावजूद इसके अधिकारियों की निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लगाई जाती। प्रदूषण से बचने को प्रशासन और आम जनता सबको मिलकर काम करना होगा।
कैलाश शर्मा