हौसले के दम पर लड़ रहे एचआईवी से जंग
गाजियाबाद। हौसले के दम पर इंसान बड़ी से बड़ी जंग जीत सकता है। यही एक मंत्र है ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएंसी वायरस ( एचआईवी ) से लड़ते हुए आगे बढ़ने का। वायरस की चपेट में आए अनेकों लोग ऐसे हैं जिन्होंने यह मंत्र अपनाया और सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। इन जुझारू लोगों ने जज्बे के दम पर न केवल कामयाबी का परचम लहराया है, बल्कि अन्य मरीजों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने हैं। विश्व एड्स दिवस पर आपको इनकी सफलता की कहानी से रूबरू कराते हैं....
मन से निकाल दिया डर
गाजियाबाद के निवासी नोएडा की बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। 15.30 लाख सालाना का पैकेज है। वह बताते हैं, एचआईवी होने का पता चला तो शुरु में डर लगा, लेकिन फिर सोचा कि जिंदगी ऐसे कैसे चलेगी। परिवार को भी तो देखना है, इसलिए मन से डर निकाल दिया। नियमित दवाई और पौष्टिक आहार लेते हैं, योगाभ्यास करते हैं। बस इसी से स्वस्थ हैं। पत्नी एचआईवी संक्त्रस्मण से मुक्त हैं।
छूने से नहीं फैलता
गुरुग्राम की कंपनी में एचआर हेड ने बताया कि वह 12 साल से एचआईवी पॉजिटिव हैं। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार ही आहार लेते हैं। लेता कंपनी के डायरेक्टर और कई सहयोगियों को उनके संक्त्रस्मित होने की जानकारी है । वे लोग साथ में लंच करते हैं, क्योंकि सब जान चुके हैं? कि एचआईवी छूने से नहीं फैलता। उनकी जिंदगी बिल्कुल सामान्य हो गई है। समझदार लोग इसे अब हौवे की तरह नहीं लेते।
जागरुकता सबसे बड़ा हथियार
गाजियाबाद निवासी ट्रांसजेंडर ने बताया कि वह आठ साल से एचआईवी संक्त्रस्मित हैं। शुरु में छह महीने तो यही लगा कि जिंदगी समाप्त हो चुकी है, लेकिन डॉक्टर ने समझाया कि डरने की कोई बात ही नहीं है, देश में लाखों लोग हैं जो संक्त्रस्मित होने के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं। इससे डर निकल गया। ट्रांसजेंडर का कहना है कि वह अब लोगों को जागरुक करते हैं। एचआईवी के खिलाफ जंग में जागरुकता सबसे बड़ा हथियार है ।
योगाभ्यास काम आया
एचआईवी संक्त्रस्मित शिक्षक ने बताया कि ऑपरेशन कराया तो पता चला कि एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव है। शुरु में तनाव रहा। रक्तचाप बढ़ गया। फिर सोचा कि डर से क्या होगा? धीरे-धीरे हिम्मत बढ़ी। अब जिंदगी सामान्य है। योगाभ्यास करता हूं, यह बहुत काम आया। इससे नई ऊर्जा मिलती है।
प्रतिक्षण क्षमता को मजबूत रखें मरीज
डायटीशियन डॉ. सविता का कहना है कि एचआईवी संक्त्रस्मण होने पर कैलोरी का खपत बढ़ाना जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस बीमारी से लड़ने के लिए शरीर के प्रतिरक्षण तंत्र को मजबूत करने की ज़रूरत होती है। संक्त्रस्मण का असर पेट पर पड़ता है, जिसके कारण पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता क्षीण हो जाती है। शरीर को उसकी पौष्टिकता नहीं मिल पाती है। एचआईवी मरीज अनाज युक्त चीजें, चावल, दाल और प्रोटीन युक्त चीजें नियमित आहार में शामिल कर सकते हैं। फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि एचआईवी के लिए जो दवाएं दी जाती है, वे पोषक तत्वों पर असर करते हैं। कुछ दवाओं से उल्टी-दस्त जैसी समस्या आती है, लेकिन यह सामान्य बात है। ऐसी दवा ले रहे हैं तो कम वसा वाले खाद्य पदार्थ खाएं।