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12 साल में 250 एटीएम हैक कर 30 करोड़ चुराने वाला गैंग बेनकाब

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12 साल में 250 एटीएम हैक कर 30 करोड़ चुराने वाला गैंग बेनकाब
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गाजियाबाद/इंदिरापुरम। साइबर सेल ने सॉफ्टवेयर से एटीएम हैक कर कैश चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को मंगल बाजार चौक से गिरफ्तार कर लिया। गिरोह 12 साल में 8 राज्यों के 250 एटीएम हैक कर करीब 30 करोड़ रुपये चोरी कर चुका है। हैदराबाद में बैठा कमल गैंग का सरगना है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए वहां की पुलिस से संपर्क किया। कमल के अलावा गैंग में शामिल शहजाद, जैद व वाजिद अभी फरार हैं। 13 जुलाई को न्यायखंड-1 में गौर ग्रीन विस्टा के पास एक्सिस बैंक के एटीएम को हैक करके करीब सात लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इस मामले की जांच के दौरान आरोपियों का सुराग लगा।
यह सामान बरामद
10 मोबाइल, एक सिम कार्ड, टाटा सफारी, फोर्ड इको स्पोर्ट, बुलेट, 16 एटीएम कार्ड, लैपटॉप-चार्जर, मुहर, पैनड्राइव, मैमोरी कार्ड, चार कार्ड रीडर, दो एनआरएफ, दो हार्ड डिस्क, दो रैम, वाईफाई की-बोर्ड, एटीएम स्कीमर, दो यूएसबी हब, दो यूएसबी, एक पी-1 डिस्प्ले सीडी ड्राइवर और एक हार्डडिस्क केबल बरामद हुई है।
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2016 में जेल से छूटकर फिर सक्रिय हो गया गिरोह
साइबर सेल के नोडल अधिकारी और सीओ इंदिरापुरम अभय मिश्र ने बताया कि 2009 से सक्रिय गैंग दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, आगरा, कानपुर और मथुरा में करीब 250 वारदात कर चुका है। गाजियाबाद के नंदग्राम, इंदिरापुरम, विजयनगर, मोदीनगर और टीला मोड़ में हुई वारदातें इसी गैंग ने की थीं। 2015 में आरोपी रुड़की से जेल गए। 2016 में जेल से छूटकर फिर से वारदात शुरू कर दीं। घटना के दौरान आरोपी पुलिस की लोकेशन में न आएं, इसके लिए वह अपने फोन को ऑफलाइन मोड पर लगा देते थे। एटीएम की सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों का सुराग लगा।
ऐसे करते थे मशीन हैक
- एटीएम हैक करने के लिए आरोपी एक डिवाइस इस्तेमाल करते थे, जिसमें सॉफ्टवेयर और एंटी वायरस से लैस पैनड्राइव, ब्लूटूथ की-बोर्ड और एटीएम खोलने की चाबी रहती थी।
- आमतौर पर फ्रिज वाली चाबी से एटीएम का लॉक खुल जाता था, लेकिन जहां लॉक नहीं खुल पाता था, वहां आरोपी लॉक तोड़ देते थे।
- लॉक खुलने पर एटीएम में पैनड्राइव लगाकर उसकी विंडो करप्ट करते थे। उसके बाद उसमें अपना सॉफ्टवेयर अपलोड करते थे। ऐसा करते ही मशीन का नियंत्रण उनके हाथ में आ जाता था।
- यहां ब्लूटूथ की-बोर्ड का इस्तेमाल कर आरोपी क्यू आर कोड जनरेट करते थे। उसे हैदराबाद में बैठे सरगना कमल को भेजते थे। इसके बाद सरगना कमल क्यूआर कोर्ड के हिसाब से कुछ अंक बताया था, जिससे मशीन ऑपरेट होने लगती थी।
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- एक कमांड देने पर एटीएम से 40 नोट निकलते थे। यह नोट 100, 500 और 2000 में से कोई भी हो सकते हैं।
नाइजीरियन गैंग से खरीदते थे सिम, ब्लॉक एटीएम कार्ड
गैंग के सदस्य साइबर ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग के संपर्क में भी थे। वह उनसे 2000 रुपये में फर्जी आईडी पर सिम और 1000 रुपये में ब्लॉक एटीएम खरीदते थे। एटीएम मशीन हैक करने के दौरान पुलिस के आने पर आरोपी ब्लॉक एटीएम दिखा देते थे कि मशीन काम नहीं कर रही है।
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