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बुखार के इलाज का बना रहे दो लाख तक का बिल

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गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल के डेंगू वार्ड में उपचारा‌धीन मरीज। फोटोःकुमार संजय
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बुखार के इलाज का बना रहे दो लाख तक का बिल
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गाजियाबाद। कोरोना के बाद अब बुखार के इलाज में निजी अस्पतालों की मनमानी सामने आई है। सामान्य बुखार में मरीजों से 1.5 से दो लाख तक वसूले जा रहे हैं। इसमें दवाइयों का खर्च ही एक लाख से ज्यादा दिखाया जा रहा है। प्लेटलेट्स के जंबो पैक के लिए 17 से 20 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। मरीज और तीमारदार इसकी शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि प्रशासन न इलाज के खर्च की कोई दर ही तय नहीं की है। न ही शिकायत सुनने के लिए किसी को जिम्मेदारी सौंपी है।
सबसे ज्यादा पैसा उन मरीजों से लिया जा रहा है जिनकी प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही हैं। इनमें डेंगू के मरीज हैं और वायरल फीवर के भी हैं। अक्तूबर में अब तक डेंगू के 521 मरीज मिल चुके हैं। निजी अस्पतालों में जाना लोगों के लिए मजबूरी है क्योंकि सरकारी में ढंग के इंतजाम नहीं है। किसी भी सरकारी अस्पताल में जंबो पैक की व्यवस्था नहीं है।
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जेब खाली होने पर पहुंच रहे सरकारी अस्पताल
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि डेंगू बुखार होने पर मरीज को दस से बीस हजार प्लेट्लेट्स होने पर भी अलग से प्लेट्लेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर ब्लीडिंग हो रही हो या काले रंग का मल आ रहा हो तो अलग से प्लेट्लेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है अन्यथा नहीं। मरीज घर पर भी स्वस्थ हो सकता है, लेकिन कुछ प्राइवेट अस्पताल मरीजों को डराकर भर्ती कर लेते हैं, उनसे मनमानी वसूली करते हैं। जब उनके पास पैसे खत्म हो जाते है तो वह सरकारी में आते हैं और सामान्य इलाज से ही स्वस्थ होकर घर चले जाते हैं।ऐसे कई मामले आए हैं।
उपचार खर्च की गाइडलाइन नहीं
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सुनील कुमार त्यागी का कहना है कि कोरोना के उपचार की गाइडलाइन जारी की गई थी। इलाज की दर भी तय हैं, लेकिन डेंगू के इलाज के लिए न गाइडलाइन है और न ही इलाज खर्च की दर तय हैं । इस कारण से स्वास्थ्य विभाग भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
निगेटिव ग्रुप के खून की किल्लत
डेंगू के मरीजों की प्लेट़्लेट्स कम होने पर सबसे अधिक परेशानी हो रही है निगेटिव ब्लड ग्रुप की। मरीजों के परिजन हापुड़, दिल्ली, बागपत और मुजफ्फरनगर तक ब्लड और डोनर के लिए संपर्क करते हैं। विजय नगर निवासी रामानंद ने बताया कि गाजियाबाद में एबी निगेटिव ब्लड नहीं मिला तो उनके एक दोस्त ने मुजफ्फरनगर से अपने रिश्तेदार को बुलाकर खून की व्यवस्था कराई। कुछ लोगों को अस्पताल का स्टाफ ही पैसे लेकर प्लेट्लेट्स उपलब्ध करा देता है तो अधिकांश लोगों को 12 से 14 घंटे लग जाते हैं ब्लड या डोनर की व्यवस्था करने में।
पांच दिन की दवाई का खर्च 1.23 लाख
मेरे भाई को बुखार हुआ था, उसे नेहरू नगर स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर दो दिन तक सिर्फ बुखार बताकर इलाज किया। दूसरे दिन बताया कि डेंगू है और जंबो पैक चढ़ाना पड़ेगा। दो जंबो पैक चढ़ाया था। पांच दिन में दवाई का खर्चा 1.23 लाख रुपये लिया है।
सचिन शर्मा, राजनगर एक्सटेंशन
बेटी के तीन दिन के इलाज के लिए 1.75 लाख
मेरी बेटी को पहले बुखार हुआ था। अस्पताल में भर्ती कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई। उसकी प्लेट्लेट्स 50 हजार थी, तभी डॉक्टर ने कह दिया था कि प्लेट्लेटस चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए डोनर की व्यवस्था कर लीजिए। हालांकि जंबो पैक की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन तीन दिन का बिल 1.75 लाख रुपये ले लिया।
सुनीता सिंह, अशोक नगर
शिकायत आई तो जांच कराएंगे
डेंगू भी सामान्य बुखार की तरह ही है। इसमें अधिक दवाई की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर ब्लीडिंग होने के साथ ही प्लेट्लेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तो उसका खर्च भी 11 हजार रुपये तय है। अगर इलाज में ज्यादा खर्च लेने की शिकायत आती है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
मरीज की स्थिति पर इलाज निर्भर करता है। हम लोग तो 90 फीसदी मरीज को ओपीडी में ही स्वस्थ कर लेते हैं। मरीज को फैमिली फिजिशियन पर विश्वास करके इलाज कराना चाहिए। हो सकता है मरीज को शॉक सिंड्रोम की परेशानी हुई है। इसलिए अधिक खर्च आया हो।
डॉ आरके गर्ग, वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन एवं आईएमए अध्यक्ष
ऐसे ले रहे पैसा
अस्पताल रूम चार्ज - 8000 प्रतिदिन
फिजिशियन विजिट खर्च - 8100
पैथौलॉजी, एक्स-रे जांच - 22580
दवाईयां एवं इंजेक्शन - 122426
कुल खर्च - 209106
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