आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने में मंडल में निचले पायदान पर जिला
गाजियाबाद। आयुष्मान योजना शुरू होने के तीन साल बाद भी 2.86 लाख लाभार्थियों में से सिर्फ साठ हजार लोगों का ही गोल्डन कार्ड बना है। जिले में 16.9 प्रतिशत लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के साथ गाजियाबाद मेरठ मंडल में सबसे निचले पायदान पर है। तीन साल में सिर्फ 6311 कार्ड धारकों को इलाज मिल पाया है। इस नाकामी पर पिछले दिनों मंडल आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए अधिक से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए जाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने भी गोल्डन कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। वहीं अधिकारी तर्क देते हैं कि आवेदक मिलते ही नहीं हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 1.48 लाख परिवारों को योजना का लाभार्थी माना गया था। दो बार सर्वे के बावजूद 57327 हजार परिवारों को ही तलाश कर सका। सरकार ने एक परिवार में पांच सदस्यों का मानक रखा था। इसके अनुसार जिले में 286635 लोग योजना के लाभार्थी हैं। इनमें सिर्फ 60 हजार लोगों के ही गोल्डन कार्ड बना सका है। अन्य परिवारों को तलाश करने और उनके गोल्डन कार्ड बनाने को लेकर शासन स्तर से कई बार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कई बार शासन स्तर से फटकार भी लगाई जा चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना था कि योजना में चयनित अधिकांश परिवार या तो जिले से पलायन कर चुके हैं या फिर सूची में दिए गए पते पर नहीं रहते। विभागीय टीमें जिले में दो बार सर्वे कर चुकी हैं, लेकिन लाभार्थी दिए गए पते पर नहीं मिल रहे। इसके अलावा जो सूची शासन से प्राप्त हुई थीं, उसमें लाभार्थियों के पते भी सही नहीं थे। इस कारण से अधिकांश लाभार्थियों का सत्यापन नहीं हो सका।
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि अधिक से अधिक लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। योजना में दो नए अस्पतालों को भी जोड़ा गया है। प्रयास किया जा रहा है कि आवेदकों को ढूंढकर उनके कार्ड बनाए जाएं।