निवाड़ी की फोरेंसिक लैब में शुरू हुई असलहों की जांच
गाजियाबाद। हत्या, आत्महत्या की घटना में गोलीबारी के पेंच को सुलझाने की दिशा में निवाड़ी स्थित फोरेंसिक लैब ने काम शुरू कर दिया है। गत एक मई से शुरू हुए बैलेस्टिक सेक्शन में अब तक मेरठ जोन के सात जिलों से असलहों के सैंपल लैब पहुंच चुके हैं। वैज्ञानिक पता लगाने में जुटे हैं कि किस असलहा से किस वक्त कितनी दूरी से गोली चलाई गई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों का कहना है कि फोरेंसिक जांच के 16 में से 10 सेक्शन की जांच निवाड़ी लैब में शुरू हो चुकी है।
नवंबर 2018 में यूपी के तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने निवाड़ी में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेसिंक लैब) का उद्घाटन किया था। 64 करोड़ की लागत से बनी नौ मंजिला फोरेंसिक लैंब की शुरूआत में कुल 16 में से 7 सेक्शन की जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद लैब के अधिकारियों ने जांच का दायरा बढ़ा ने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। निवाड़ी फोरेंसिक लैब के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि वर्तमान में विधि फोरेंसिक लैब में 10 सेक्शन के सैंपल की जांच की जा रही है। बीते एक मई से बैलेस्टिक सेक्शन के अलावा डीएनए व सीरोलॉजी सेक्शन की जांच भी की जा रही हैं।
बरेली जोन के डीएनए भी जांच रही लैब
निवाड़ी फोरेंसिक लैब के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि मेरठ जोन स्तर पर बनी लैब में मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, और शामली जिलों से आने वाले सैंपल की जांच की जाती थी। डीएनए प्रोफाइलिंग शुरू होने पर बरेली व आगरा जोन के सैंपल भी निवाड़ी लैब भेजे गए थे। डीएनए टेस्ट में आगरा जोन को अलग कर दिया गया है। मेरठ व बरेली जोन के डीएनए सैंपल की जांच निवाड़ी लैब में की जा रही है।
बढ़ेगी वैज्ञानिकों की संख्या
वर्ष 2018 में निवाड़ी फोरेंसिक लैब 110 वैज्ञानिकों के साथ शुरू की गई थी। उस दौरान सिर्फ सात सेक्शन की जांच चल रही थी। जांच का दायरा बढ़ाते हुए सात सेक्शन की जांच भी की जाने लगी है। जबकि छह सेक्शन की जांच शुरू होना अभी बाकी है। लैब के अधिकारियों के मुताबिक फोरेंसिक लैब में अलग-अलग सेक्शन के174 वैज्ञानिक एक साथ काम कर सकते हैं। जांच का दायरा बढ़ने पर वैज्ञानिकों की संख्या भी बढ़ेगी।