शाबाश आयुषी! तुम पर गाजियाबाद को नाज है
गाजियाबाद। बेटियों के पास भी पंख होते हैं, कभी उनके अरमान देखो, एक मौका और थोड़ा सा हौसला दो, फिर उसकी ऊंची उड़ान देखो। शहर की बेटी आयुषी सोनी ने इस बात को साबित कर दिखाया है। आयुषी को बीसीसीआई की ओर से फोन पर बुलावा आया है। उन्हें टी-20 सीरीज के कैंप में शामिल किया गया है। छोटे से घर से निकलकर सफलता की मंजिल पर पहुंचने वाली आयुषी की यह कहानी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है, जो कुछ बड़ा करने के लिए संघर्ष कर रही है।
शहर के विजयनगर की रहने वाली 20 वर्षीय आयुषी सोनी देश की उभरती क्रिकेटर हैं। वह घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करती हैं। साथ ही कप्तानी भी कर चुकी हैं। घरेलू क्रिकेट में हर स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन का ही नतीजा है कि उनको ये मुकाम मिला है। आयुषी का कहना है कि बीसीसीआई की ओर से उनको फोन आया है। टी-20 सीरीज के कैंप में उसे शामिल किया गया है।
प्रस्तुत है अमर उजाला से उनकी खास बातचीत। (संवाद)
फोन आते ही भावुक हो गईं मां
आयुषी को मंगलवार रात नौ बजे बीसीसीआई की ओर से फोन आया। उसके बाद उनको टीम के ऑफीशियल व्हॉट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। सूचना मिलते ही उनके परिवार में खुशी का माहौल बन गया। उनकी मां के आंसू छलक आए। उन्होंने अपने कोच और सीनियर को फोन कर बताया। जिसके लिए वह दिन-रात पसीना बहा रही थीं। आज वह पूरा हो गया है। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने ईश्वर, माता-पिता, कोच व सीनियर को दिया। वह बृहस्पतिवार को टीम कैंप में जुड़ेंगी। 20, 21 व 24 मार्च को भारतीय टीम लखनऊ मेें टीम इंडिया, अफ्रीका के खिलाफ तीन मैच खेलेगी।
भाई कोे देख पिता के बल्ले से शुरू किया खेलना
आयुषी के घर में बचपन से क्रिकेट का माहौल रहा है। उनके पिता आरके वर्मा अपने समय में एमएमएच कॉलेज की क्रिकेट टीम में शामिल रहे हैं। अपने बेटे यश को प्रोफेशनल क्रिकेटर बनाकर अपना सपना पूरा करना चाहते थे। पिता और भाई के साथ आयुषी का भी क्रिकेट के प्रति रुझान बढ़ने लगा। उनकी प्रतिभा को देखकर उनके पिता ने भाई के साथ नेहरू स्टेडियम में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराई। धीरे-धीरे वह क्रिकेट से और क्रिकेट उनसे जुड़ता गया। उनका प्रदर्शन दिन प्रतिदिन बेहतर होता गया। जब वह खेलने जाती थीं तो लोग चिढ़ाते थे लेकिन वह बिना विचलित हुए अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहीं। उन्होंने यूपीसीए का ट्रायल दिया। कैंप के लिए चयन हुआ लेकिन अंतिम टीम में जगह नहीं मिल पाई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में एकेडमी ज्वॉइन कर वहीं से खेलना शुरू किया।
रमेश चोपड़ा ने निभाई द्रोणाचार्य की भूमिका
आयुषी सोनी ने बताया कि वैसे तो उनकी प्रतिभा को निखारने में पापा से लेकर अभी तक मिले कोच व सीनियर साथियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मगर कोच रमेश चोपड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वह अभी रमेश चोपड़ा क्रिकेट एकेडमी में ही प्रैक्टिस कर रही हैं। यहां तक पहुंचाने में उनका खास योगदान रहा है। इसके अलावा द्रोणाचार्य अवार्डी सुनीता शर्मा, रीमा मल्होत्रा व रीता डे की भी अहम भूमिका रही।
नेहरू स्टेडियम से एनसीए पहुंचते ही बदली तस्वीर
शुरुआत में आयुषी नेहरू स्टेडियम में प्रैक्टिस करती थीं। बाद में अपने खेल की बदौलत उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी में जगह बनाई। जहां उन्हें सुनीता शर्मा के मार्गदर्शन में क्रिकेट की बारीकी सीखने को मिली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की रणजी टीम में जगह बनाई। वह दिल्ली की बेस्ट महिला अंडर-19 प्लेयर रह चुकी हैं। बीसीसीआई के क्षेत्रीय टूर्नामेंट में भी उन्होेंने नॉर्थ जोन की कप्तानी की थी। बाद में रमेश चोपड़ा ने उनके खेल को और धार दी।
सामान्य घर से निकल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दस्तक
आयुषी सोनी बेहद सामान्य परिवार से आती हैं। उनके पिता राजकु मार वर्मा श्रम विभाग में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत हैं। जबकि मां सीमा सोनी गृहिणी हैं। आयुषी ने बताया कि उनके करिअर में माता-पिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे पहले तो लड़की होने के बावजूद क्रिकेट खेलने की छूट दी। उसके बाद उनके खेल के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। उसके साथ शुरू में मैच में जाते थे। मगर अब वह खुश हैं कि माता-पिता का सपना पूरा कर रही हैं।
महिला आईपीएल में भी किया था प्रतिभाग
बीसीसीआई की ओर से आईपीएल की तर्ज पर आयोजित महिला टी-20 चैलेंज टूर्नामेंट में भी वह प्रतिभाग कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों से सजे इस टूर्नामेंट में उनको भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली सुपरनोवाज में जगह मिली है।
सुरेश रैना ने दी शुभकामनाएं
शहर के पहले अंतरराष्ट्रीय और भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने भी आयुषी सोनी को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इसे शहर के लिए गौरव बताया।