अब सेहत के लिए शुद्ध नहीं रहा दूध
गाजियाबाद। आपके घर में आने वाला दूध मिलावटी तो नहीं है। कहीं आप दूध के नाम पर केमिकल से बना पदार्थ तो नहीं पी रहे हैं, अगर अब तक आपने इस पर ध्यान नहीं दिया तो अब सावधानहो जाइए। क्योंकि बाजार में बिकने वाला दूध और उससे बना लगभग हर दूसरा उत्पाद नकली है। ये खुलासा हुआ है खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए सैंपल से। पिछले साल विभाग ने दूध और उससे बनी चीजों के जितने नमूने लिए उनमें से आधे के सैंपल जांच में फेल हो गए। इससे स्पष्ट है कि स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्द्घक खाद्य पदार्थों के नाम पर आपके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बाजार में जमकर मिलावटी सामान बेचा जा रहा है। ऐसे में त्योहार के मौके पर अगर आप दूध और उससे मिठाई या कोई दूसरा खाद्य पदार्थ खरीदने जा रहे हैं तो सावधानी बरतने की जरूरत है। विभाग ने 2019-20 दूध और दुग्ध उत्पादों (खोया, पनीर, घी, बटर, मिल्क स्वीट्स आदि) के 318 सैंपल लिए। इसमें से 147 सैंपल जांच में फेल पाए गए। इसमें से 103 सैंपल मिलावटी निकले जबकि 33 सैंपल असुरक्षित की श्रेणी में पाए गए। असुरक्षित मतलब इनका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जिले में रोजाना लाखों लीटर दूध की खपत होती है। तमाम कंपनियों के साथ दूधिया दूध की सप्लाई करते हैं। खाद सुरक्षा विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि मुनाफा कमाने के चक्कर में दूध में जमकर मिलावट का खेल चल रहा है। दुग्ध उत्पादों में पनीर और खोया में सबसे ज्यादा मिलावट पाई गई है। इसी तरह मिठाइयों में रंग के नाम पर सीधे केमिकल मिलाया जा रहा है। खासकर रंगीन मिठाई और दूध व उससे बने अन्य उत्पादों में सबसे ज्यादा मिलावट की जा रही है।
केवल 38 फीसदी मामले पहुंचे कोर्ट तक
खाद्य पदार्थ में मिलावट करना अपराध की श्रेणी में आता है। पकड़े जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन अधिकतर मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती। जिले में मिलावट के जितने मामले सामने आए उनमें से केवल 38 फीसदी ही कोर्ट तक पहुंचे। उनमें से अब तक मात्र 18 फीसदी मामलों में सुनवाई पूरी हो पाई है। हालांकि किसी को भी सजा नहीं हुई।
दूध में रिफाइंड और डिटर्जेंट की होती है मिलावट
दूध में रिफाइंड और डिटर्जेंट की मिलावट पाई गई। रिफाइंड मिलाए जाने से दूध के अंदर मलाई ज्यादा आती है। ग्राहक को लगता है कि दूध में पानी की मिलावट नहीं की जा रही है। उन्हें अच्छा और शुद्ध दूध मिल रहा है। जबकि डिटर्जेंट का इस्तेमाल नकली दूध बनाने में किया जाता है। त्योहार के दिनों में मांग बढ़ जाने पर मिलावट का खेल बढ़ जाता है। मोटा मुनाफा कमाने के लिए धड़ल्ले से मिलावट की जाती है। इसी तरह से रंग वाली मिठाइयों में कारसोनिक कलर पाए गए हैं जो लीवर, फेफड़ों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक होते हैं।
जुर्माने के बाद भी नहीं सुधरे
खाद सुरक्षा विभाग की ओर से मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई। इस दौरान मुनाफाखोरों से भारी जुर्माना भी वसूला गया। दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के 61 मामलों में 21.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। दूध में मिलावट पर 6.7 लाख तथा खोया में मिलावट पर सर्वाधिक 8.6 लाख रुपये जुर्माना वूसला गया। बावजूद इसके मिलावट में कमी नहीं आई।
इस साल भी नहीं बदले हालात
इस साल लॉकडाउन के चलते शुरुआती महीनों में मिल्क प्रोडक्ट का उत्पादन कम रहा। विभाग ने 44 सैंपल लिए। इस दौरान 105 सैंपल की रिपोर्ट आई, जिसमें 68 सैंपल फेल पाए गए। जबकि 16 मामलों में कुल दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
मिलावट को लेकर विभाग बेहद सख्त है। जिलेभर में टीम द्वारा लगातार औचक निरीक्षण और छापा की कार्रवाई की जाती है। समय-समय पर सैंपल लिए जाते हैं। यह कार्रवाई लगातार जारी है। सैंपल फेल होने पर मामला कोर्ट में चला जाता है।
- विनीत कुमार, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
मिलावटी खाद्य पदार्थ शरीर के हर अंग के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। मिलावटी सामग्री का प्रयोग करते हैं तो पेट लंबे समय के लिए खराब हो सकता है। भूख नहीं लगेगी और आंतों में सूजन आने का खतरा रहेगा। अपच के साथ ही एसिड भी बनता है। इससे पाचन तंत्र बिगड़ सकता है। यह बीमारी लंबी भी हो सकती है। गैस की बीमारी भी मिलावटी वस्तुएं खाने से हो सकती है। कई बार मिलावटी चीजें खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आने का भी खतरा बना रहता है।
- डॉ. अरविंद डोगरा वरिष्ठ फिजीशियन