रैपिड रेल नेटवर्क को सिग्नल देगा आधुनिक यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम
गाजियाबाद। रैपिड रेल के साहिबाबाद से दुहाई तक पहले प्राथमिकता खंड में ट्रायल रन की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। 17 किमी लंबे पहले खंड के साथ 82 किमी लंबे पूरे कॉरिडोर के नेटवर्क को आधुनिक यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम सिग्नल देगा। इस तकनीक की मदद से स्टेशनों के प्लेटफार्म पर लगने वाले प्लेटफार्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) ऑटोमेटिक रूप से संचालित होंगे। वहीं, इस सिस्टम की मदद से रैपिड रेल दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के बाद आगे प्रस्तावित दूसरे दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर पर आसानी से आवाजाही कर सकेगी।
आधुनिक यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विश्व की सबसे आधुनिक सिग्नल तकनीक में से एक है। यह सिस्टम फोज-जी नेटवर्क में एलटीई संचार तकनीक पर चलता है। यूरोपियन मानकों के तहत बनी इस हाइब्रिड सिग्नल प्रणाली का देश में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रणाली की सटीकता इसकी खासियत होती है। जिससे किसी प्रकार की गलती की संभावना न के बराबर रह जाती है।
प्राथमिकता खंड में लगाए जा रहे उपकरण
रैपिड रेल के प्राथमिकता खंड में छह कोच की ट्रेन अब पटरी पर आ चुकी है। जल्द इस ट्रेन के तकनीकी परीक्षण शुरू होंगे। ऐसे में प्राथमिकता खंड के साहिबाबाद, गाजियाबाद मेरठ रोड तिराहा, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो पांच स्टेशनों और ट्रैक पर सिग्नल प्रणाली को लगाने का काम तेजी से जारी है। जिससे जल्द ट्रायल रन की शुरुआत की जा सके।
किसी भी मौसम का नहीं कोई प्रभाव
एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि यूरोपियन स्टैंडर्ड की सिग्नल प्रणाली का पहली बार देश में इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्दी, गर्मी, बारिश सहित किसी भी मौसम में प्रणाली की मदद से रैपिड रेल का संचालन नहीं रुकेगा। इस प्रणाली की मदद से ऊर्जा की बचत होने के साथ ट्रेनों का संचालन समय पर सुनिश्चित होगा।