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33 करोड़ बढ़ गई लागत, आठ साल में बुनकरों को नहीं मिला मार्ट

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33 करोड़ बढ़ गई लागत, आठ साल में बुनकरों को नहीं मिला मार्ट
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गाजियाबाद। बुनकरों को बड़ा बाजार देने की योजना अफसरों की लेटलतीफी की भेंट चढ़ गई है। आठ साल पहले जिस बुनकर मार्ट का शिलान्यास गाजे-बाजे के साथ किया गया था, वह आज भी अधूरा ही है। इस बीच इसकी लागत 200 से बढ़कर 233 करोड़ हो गई है। 2016 में अखिलेश यादव की सरकार के समय शुरु हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा बार-बार बढ़ाई जा रही है, लेकिन योगीराज 2.0 आ जाने पर भी तय नहीं है कि बुनकरों की उम्मीद की यह इमारत कब तक पूरी हो पाएगी।
गाजियाबाद विकास प्राधिकण (जीडीए) की मधुबन बापूधाम योजना में बनाए जा रहे इस मार्ट का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है, लेकिन दो साल से यह आगे नहीं बढ़ रहा है। पहले कोरोना का बहाना था फिर जिन किसानों ने मार्ट के लिए जमीन दी, वे बढ़ा हुआ मुआवजा मांगने लगे। जीडीए के अफसर उन्हें मना नहीं पाए। प्रशासन ने भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि जो प्रोजेक्ट 2018 में पूरा किया जाना था, वह 2022 में भी मुकम्मल नहीं है। काम पूरा होने की समय सीमा पहले छह-छह महीने बढ़ाई गई। फिर अंतराल बढ़ा दिया और अब कोई तारीख ही तय नहीं है।
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दिल्ली हाट की तर्ज पर विकसित करने की है योजना
बुनकर मार्ट प्रगति मैदान और दिल्ली हाट की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। बुनकर आठ साल से इंतजार में है कि यह कब पूरा हो? सिर्फ गाजियाबाद ही नहीं, आस पास के जिलों के बुनकरों को भी इसका लाभ मिलना है। हापुड़ के पिलखुवा, बागपत के खेकड़ा, गाजियाबाद के लोनी में बुनकरों की अच्छी-खासी संख्या है। प्रदेश सरकार की योजना बुनकरों को मंच देने के साथ उनके माल को बिचौलियों से बचाकर सही दाम दिलवाने की है। मार्ट को एक कला केंद्र के तौर पर विकसित किया जाना है। निर्यातकों के ठहरने के साथ कई स्तरीय सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
किसानों का विरोध, दो साल से काम लगभग ठप
मधुबन बापूधाम योजना में सदरपुर सहित छह गांव के किसान एक समान मुआवजे की मांग को लेकर बीते दो साल से आंदोलनरत हैं। सदरपुर प्राथमिक विद्यालय में किसानों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। किसान कई बार बुनकर मार्ट के चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा चुके हैं। जीडीए व किसानों के बीच कई दफा टकराव की स्थिति बन चुकी है। जीडीए अधिकारी नियमों और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए किसानों की मांग मानने से साफ इनकार कर रहे हैं।
12 साल में लागत वसूलने की थी योजना
जीडीए की योजना 2018 में बुनकर मार्ट का निर्माण कार्य पूरा करने की थी। समय लंबा खिंचने के कारण प्रोजेक्ट की लागत में इजाफा हुआ है। प्राधिकरण की योजना निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 12 साल के अंदर लागत को वसूलने की थी। जीडीए ने प्रोजेक्ट से सालाना चार करोड़ की आय की उम्मीद जताई थी।
ऑडिटोरियम व कंवेंशन हॉल बनेगा
बुनकर मार्ट में 13740 वर्ग मीटर क्षेत्र में बड़े ऑडिटोरियम और कंवेंशन सेंटर का निर्माण होना है। वहीं, ऑडिटोरियम के साथ सांस्कृतिक केंद्र में कई दुकानों के जरिए जीडीए को हर माह लाखों की आय की उम्मीद थी। पहले कोरोना संक्त्रस्मण और फिर किसानों के विरोध ने योजना पर पानी फेर दिया।
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चल रहा है मंथन
जीडीए मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि किसानों के विरोध के कारण बुनकर मार्ट का निर्माण कार्य लगभग बंद है। प्रोजेक्ट के बाकी बचे कार्य को जल्द पूरा कराया जाएगा। काम को फिर से शुरू कराने के लिए विभागीय स्तर पर मंथन जारी है। मार्ट के साथ बाकी प्रोजेक्ट के कार्य में तेजी आएगी।
तारीख पर तारीख
1. पहली समय सीमा - दिसंबर 2018
2. दूसरी समय सीमा - जुलाई 2019
3. तीसरी समय सीमा - दिसंबर 2019
4. चौथी समय सीमा - जुलाई 2020
5. पांचवी समय सीमा - सितंबर 2021
( इसके बाद कोई तारीख तय नहीं की )
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