भय और भ्रांतियों को दरकिनार कर बेटियां लगवा रहीं भरोसे का टीका
गाजियाबाद। भय और भ्रांति से ऊपर उठकर बेटियां कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भरोसे का टीका लगवा रही हैं। इससे टीकाकरण से बचने और डर के कारण टीका न लगवाने का मिथक भी टूटा है। जिले में 12 से 17 साल तक के 365678 किशोर-किशोरियों ने टीका लगवाया है। इनमें से 189839 लड़के और 176839 लड़कियां हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल का कहना है कि बेटियां जैसे हर काम में आगे रहती हैं, उसी तरह टीकाकरण में भी आगे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ पिछड़े इलाकों में समस्या आई थी लेकिन अब सभी टीका लगवा रहे हैं।
काउंसिलिंग के जरिए किया जाता है जागरूक
यूनिसेफ के जिला कोआर्डिनेटर मोहम्मद शादाब का कहना है कि कई परिजन के लिए उनके बच्चे को टीका लगवाने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन कई मां-बाप ऐसे हैं, जो विरोध कर देते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ विशेष क्षेत्रों में भ्रांतियां फैली हैं कि टीकों में हानिकारक पदार्थ होते हैं। उन्हें जागरूक किया जाता है कि ऐसी कोई चीज टीके में शामिल नहीं है, जिससे नुकसान हो।
मासिक धर्म पर नहीं है कोई दुष्प्रभाव
आईएमए की उपसचिव व महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्पना कंसल का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में लड़कियों के बारे में भ्रांतियां बना दी गई थी कि टीका लगवाने से मासिक धर्म पर दुष्प्रभाव पड़ता है। हमारी टीम ने लोगों को जागरूक कर बताया कि इस वैक्सीन से माहवारी पर कोई असर नहीं होता है। यह अफ वाह है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, इसलिए बेटियों को तनाव मुक्त होकर टीका लगवाना चाहिए। मां बनने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि किसी भी अफ वाह पर आंख बंदकर भरोसा न करें और वैक्सीन जरूर लगवाएं।
पहले दिन लगवाया था टीका
अक्षता आर्या ने कहा कि जिस दिन 15 से 17 साल वालों का टीकाकरण शुरू हुआ था, मैंने उसी दिन लगवा लिया था। दूसरा टीका लगने का मैसेज आया तो वह भी लगवा लिया। पहला टीका लगवाने के पहले डर लगा था, लेकिन मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई।
चाची रोकने के बावजूद टीका लगवा लिया
खुशी गोयल ने कहा कि टीका लगवाने के लिए पहले चाची ने मना किया था कि कुछ दिन रुको सभी का एक साथ लगवाएंगे। स्कूल में सभी दोस्त लगवा रहे थे तो मैंने भी लगवा लिया। घर पर बताया तो चाची ने दूसरे दिन एक भाई और दो बहन को भी लगवा दिया।
झूठ बोलकर लगवा लिया टीका
मुस्कान ने कहा कि जिस समय टीका लग रहा था, मैम पूछ रही थी कि किसी को एक सप्ताह से बुखार तो नहीं आया है। मुझे तीन दिन पहले बुखार हुआ था, लेकिन मैंने झूठ बोल दिया कि मुझे बुखार ही नहीं हुआ और टीका लगवा लिया। कोई परेशानी नहीं हुई।
मुझे दो बार कर दिया था वापस
शिवानी यादव ने कहा कि मैं अस्पताल कैंपस में ही रहती हूं, रोज टीका लगवाने वालों की भीड़ देखकर मैं भी टीका लगवाने के लिए पहुंच जाती थी, लेकिन उम्र कम बताकर वापस कर देते थे, जिस दिन 15 साल उम्र का टीकाकरण शुरू हुआ उसी दिन लगवा लिया।
8 फरवरी से रोज पूछती थी कब लगेगा टीका
आस्था वर्मा ने बताया कि भाई ने 8 फरवरी को टीका लगवा लिया था, वह मुझे रोज चिढ़ाता था कि हम लोगों को टीका नहीं लगेगा। मैं रोज पापा से पूछती थी कि हम लोगों को कब टीका लगेगा। जिस दिन शुरू हुआ उसी संजय नगर में लगवा लिया।
दोस्तों ने डरा दिया था
स्वर्णिका मिश्रा ने कहा कि टीका लगवाने से पहले दोस्तों ने डरा दिया था कि टीका लगने के बाद बुखार हो जाता है, इसलिए मत लगवाना। जबकि सभी दोस्त टीका लगवा चुके थे। मैंने सबसे मना कर दिया था टीका नहीं लगवाऊंगी, जिस दिन लगा सभी को मैसेज भेज दिया।
12 से 17 साल का टीकाकरण - 365678
किशोर - 189839
किशोरियां - 176839
12 से 14 साल कुल टीका - 13146
लड़के - 6973
लड़कियां - 6173
15 से 17 साल - 352532
किशोर - 176545
किशोरियां - 175987