अस्पताल प्रबंधन ने मौत के 10 घंटे बाद दिया महिला का शव
गाजियाबाद। संतोष अस्पताल में भर्ती महिला की मौत के 10 घंटे बाद शव परिजनों को दिया गया। परिजनों के विरोध और हंगामा करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 56 हजार रुपये की जगह 30 हजार रुपये भुगतान कराने के बाद 10:30 बजे शव दिया, जबकि मौत रात 12 से एक बजे के बीच होना बताया है। परिजनों ने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील त्यागी का कहना है कि इस तरह का कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है, अगर कोई शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी।
शास्त्रीनगर के महेंद्रा एंक्लेव रजापुर निवासी निवासी कैलाश एक फैक्टरी में श्रमिक हैं। उनकी पत्नी कलावती (50) के पेट में दर्द हुआ तो परिजनों ने संतोष अस्पताल में भर्ती कराया। कलावती के बेटे रोहित ने बताया कि दो दिन तक अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें किसी तरह की जानकारी नहीं दी और शुक्रवार की रात लगभग 12 बजे उन्हें कलावती के मौत की सूचना दी। महिला को पहले दो दिन तक आईसीयू में रखा गया था और शुक्रवार को उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया, जिसकी कोई जानकारी परिजनों नहीं दी गई। रोहित का आरोप है कि डॉक्टरों ने आपरेशन करने के बारे में भी कोई सूचना नहीं दी, इसके बावजूद शुक्रवार रात तक इलाज का खर्च 45 हजार रुपये बता दिया गया। शनिवार सुबह 70 हजार रुपये का बिल बताया गया। हंगामा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 30 हजार रुपये जमा करके शव लेने को कहा। भुगतान करने के बाद उन्हें शव सौंपा गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला का शव फूला हुआ था, जिससे ऐसी आशंका है कि उनकी मौत पहले ही हो चुकी थी।
संतोष अस्पताल के प्रभारी डॉ. मनीष सब्बरवाल का कहना है कि महिला को काफ ी गंभीर स्थिति में लाया गया था। महिला को जरूरी उपचार दिया गया, लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल में बेड चार्ज और डॉक्टर की कोई फ ीस मरीजों से नहीं ली जाती है। सिर्फ दवाइयों का चार्ज लिया गया है।
सुबह पेपर था, रात में मां की हो गई मौत
शनिवार को रोहित का 12वीं का पेपर था लेकिन वह परिवार के साथ अस्पताल में ही मौजूद था। रोहित के साथ पढ़ाई करने वाले कई दोस्त भी अस्पताल में उपस्थित थे। शव ले जाने के बाद रोहित और उसका एक दोस्त गुलाब पेपर देने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन रिश्तेदारों ने समझाकर पेपर देने के लिए स्कूल भेजा। इसके बाद उनकी मां का अंतिम संस्कार किया गया।