मैंने नहीं लिया दहेज, अधिकारी कर गए परहेज
गाजियाबाद। समाज में दहेज प्रथा को रोकने के लिए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष अक्तूबर में आदेश जारी किया था कि सभी सरकारी कर्मचारी- अधिकारी यह शपथपत्र दें कि उन्होंने अपनी शादी में दहेज नहीं लिया है। लगभग 17 हजार कर्मचारी व अधिकारी वाले जिले में आदेश के छह माह बाद भी महज एक अधिकारी ने शपथपत्र दिया है। आदेश के 15 दिनों के अंदर सभी अधिकारियों कर्मचारियों को शपथपत्र देना था।
दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराई है और दहेज नहीं लेना, इस संदेश को समाज में फैलाने के लिए शासन ने सरकारी कर्मचारियों से इस अभियान की शुरूआत की थी। शपथपत्र में सभी को यह लिखकर देना था कि उन्होंने शादी के समय दहेज नहीं लिया है।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग को इसका नोडल बनाया गया है। सभी को शपथपत्र डाक के जरिये या ईमेल के जरिये विभाग के पास भेजना था। इसके बाद विभाग द्वारा इसको वेबसाइट पर अपलोड करना था। विभाग की तरफ से 15 दिन बाद रिमाइंडर भी भेजा गया था लेकिन उसके बाद भी किसी ने इसको गंभीरता से नहीं लिया है। 18 अक्तूबर 2021 तक यह शपथपत्र सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना था लेकिन जिले में केवल डिस्ट्रिक्ट प्रोबेशन ऑफिसर विकास चंद्रा को छोड़कर अभी तक किसी ने शपथपत्र नहीं दिया है। किसी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज है तो उसे भी उसका पूरा ब्योरा देने के आदेश हैं।
कोट्स
डीपीओ विकास चंद्र ने बताया कि मैंने अक्तूबर माह में ही अपना शपथपत्र दे दिया था। शासन की तरफ से एक फार्मेट भेजा गया था जिसको भरकर देना था। इसमें यह भी उल्लेख करना था कि शादी के समय दहेज लिया है या नहीं लिया है। मैंने दहेज नहीं लिया है और इसका शपथपत्र मैंने दे दिया है।
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क्या शपथ पत्र देना था इसकी ठीक ठीक जानकारी नहीं है। शासनादेश देखने के बाद ही कुछ बता सकता हूं।
राकेश सिंह, जिलाधिकारी