फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

22 करोड़ के मुआवजा घोटाले में बिल्डर और पूर्व एडीएम का रिश्तेदार गिरफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
22 करोड़ के मुआवजा घोटाले में बिल्डर और पूर्व एडीएम का रिश्तेदार गिरफ्तार
विज्ञापन

गाजियाबाद। 22 करोड़ के मुआवजा घोटाले में नामजद आरोपी बिल्डर गोल्डी गुप्ता और उसके सहयोगी सुधाकर मिश्रा को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। गोल्डी को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। उसने फर्र्जी समिति बनाकर यह घोटाला किया। सुधाकर मिश्रा गाजियाबाद में एडीएम के पद पर तैनात रहे एक पीसीएस अधिकारी का रिश्तेदार है। उसकी भूमिका गोल्डी की राजस्व कर्मियों और अफसरों से जान पहचान कराने की रही।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण में हुए घोटाले में प्रशासन की जांच के बाद बृहस्पतिवार को दो और शुक्रवार को एक एफआईआर दर्ज कराई गई। गोल्डी पहली और सुधाकर दूसरी व तीसरी एफआईआर में नामजद है। एफआईआर के बाद भी दोनों को गिरफ्तारी का डर नहीं था। इसका पता इससे चलता है कि दोनों शहर में ही घूम रहे थे। एसटीएफ मेरठ ने उन्हें विजय नगर से पकड़कर सिहानी गेट थाना पुलिस को सौंपा। सुधाकर का घर विजय नगर क्षेत्र में ही है। पुलिस ने बताया कि गोल्डी गुप्ता सफदरजंग एंक्लेव, दिल्ली और सुधाकर मिश्रा क्रासिंग रिपब्लिक, विजय नगर का रहने वाला है। गोल्डी की स्टार लाइट के नाम से फर्म है। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि एसटीएफ दोनों से पूछताछ करेगी।
विज्ञापन

ऐसे किया घोटाला
गोल्डी और उसके साथियों की अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के नाम से समिति थी। यह 1999 में निरस्त हो गई थी। 2012 में बगैर पंजीकरण के समिति चालू कर दी गई। इसके लिए फर्जी दस्तावेज से अध्यक्ष, सचिव और सदस्य बनाए गए। समिति के सदस्यों की रसूलपुर सिकरोडा और और मटियाला गांव में जमीन थी। एक्सप्रेसवे के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ तो 2012 में बैनामों पर रोक लग गई। इसके बाद फर्जी समिति ने बैनामे किए। फिर जमीन के खरीदारों ने जमीन अधिग्रहण में देकर मोटा मुआवजा लिया। एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने जांच कराई तो 22 करोड़ की रकम का आकलन किया गया। आरोपियों से इस रकम की वसूली की जाएगी।
दस गुना तक लिया मुआवजा
मध्यस्थता के जरिये जमीन का मोटा मुआवजा लिया गया। जांच में
पाया गया कि जमीन की कीमत का दस गुना तक मुआवजा मिला। जमीन अधिग्रहण में यह दूसरा घोटाला था। इससे पहले 25 करोड़ का खेल हुआ था। पूर्व में हुई जांच में तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी, विमल शर्मा, एडीएम भूमि अध्यापित घनश्याम सिंह समेत कई अन्य अधिकारी और कर्मचारियों का नाम सामने आ चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विमल शर्मा और निधि केसरवानी के खिलाफ दस दिन पहले ही कार्रवाई की है।
शक के घेरे में एडीएम का दफ्तर भी
गाजियाबाद। 22 करोड़ के जमीन घोटाले की एफआईआर में एडीएम भूमि अध्यापित के दफ्तर के 2016 में तैनात रहे कर्मचारियों, सब रजिस्ट्रार और राजस्व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। इन सभी की भूमिका की जांच चल रही है। उस समय एडीएम भूमि अध्यापित घनश्याम सिंह थे। वह पहले से ही शक के घेरे में है। मेरठ के तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने जमीन अधिग्रहण की जो जांच की थी, उसमें भी उनकी भूमिका पर सवाल उठाया गया था।
अब सवाल उठ रहा है कि एडीएम और उनके दफ्तर के कर्मचारियों ने समिति की जांच किए बगैर ही 22 करोड़ का मुआवजा कैसे बांट दिया, जांच पर शासन की नजर है। जल्द ही कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए गाजियाबाद में 19 गांव के 4794 किसानों की 296 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ था। एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 27.6 किलोमीटर है। अधिग्रहीत जमीन के एवज में करीब 1400 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है। इसमें अब तक 47 करोड़ का घपला सामने आ चुका है।
तीन एफआईआर दर्ज
पहली एफआईआर में गोल्डी और अरुण कुमार नामजद हैं। अरुण गोल्डी का पिता है। दूसरी एफआईआर में सुधाकर मिश्रा और अरुण कुमार नामजद हैं। कुल चार आरोपी हैं। दो के नाम नहीं खोले हैं। ये हैं तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और तत्कालीन राजस्वकर्मी। तीसरी एफआईआर में अरुण कुमार, किश्मिश निवासी कल्लूगढ़ी, डासना, उसका बेटा फतेह मोहम्मद, सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। इसमें एडीएम भूमि अध्यापित, सब रजिस्ट्रार, राजस्वकर्मी भी आरोपी हैं लेकिन उनके नाम नहीं खोले गए हैं।
विज्ञापन

फर्जी समिति के सदस्य
मधुसूदन गुप्ता, शांति देवी, निर्मला देवी, दीपचंद, लाजवंती, ज्ञानचंद, श्रवण कुमार, धर्मपाल, कुसुमलता, शशि गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, अरुण कुमार, सत्यपाल, रविंद्र कुमार, विपिन कुमार हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें