मुआवजे की मांग को लेकर 336 दिनों से रईसपुर गांव में धरने पर बैठे किसानों का धैर्य सोमवार को टूट गया। किसानों ने वार्ता के लिए आए अधिकारियों को साढ़े तीन घंटे तक बंधक बनाए रखा।
किसान पानी की टंकी, सीवर व पानी की पाइप लाइन और दो ट्यूबवेलों को चलाने की मांग कर रहे थे। 15 दिन में मांगें पूरी करने का आश्वासन देने पर ही किसानों ने अफसरों को छोड़ा।
धरनारत किसानों की अगुवाई कर रहे भाकियू के मेरठ मंडल अध्यक्ष राजवीर सिंह ने बताया कि आठ साल पूर्व जीडीए ने गांव में 6.5 करोड़ की लागत से पानी की टंकी बनवाई थी। वहीं, करीब पौने दो करोड़ रुपये की लागत से सीवर व पानी की लाइन डालकर दो ट्यूबवेल लगवाई थी, मगर इनका लाभ ग्रामीणों को अब तक नहीं मिला है।
देखरेख के अभाव में पानी की टंकी, ट्यूबवेल, सीवर और पानी की लाइन जर्जर हो चुकी हैं। इसी बाबत वार्ता के लिए सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एसडीएम नितिन मदान, एडीएम एलए घनश्याम सिंह, नगर निगम के संपत्ति अधिकारी एमपी सिंह, जीडीए के अधिशासी अभियंता आरके दिवाकर और कविनगर एसएचओ अशोक सिसौदिया किसानों के बीच पहुंचे थे।
किसान अपनी समस्याओं को लेकर ठोस आश्वासन चाहते थे। अधिकारियों के टालमटोल करने पर किसानों ने उन्हें बंधक बना लिया। अधिकारियों के 15 दिन में काम शुरू कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर शाम करीब पांच बजे किसानों ने उन्हें छोड़ा।
इस दौरान हरेंद्र नेहरा, राजवीर सिंह, बिजेंद्र सिंह, पार्षद हरीश चौधरी, राजेंद्र सिंह, महिला जिलाध्यक्ष उर्मिला, भगवती, सीमा, जगवती समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।