ई-रिक्शा को परिवहन विभाग की मान्यता मिलते ही सैकड़ों वाहन बेकार हो गए हैं। एक ओर जहां 250 गरीबों को रोजगार मिला है, वहीं करीब पांच हजार गरीबों के हाथों से रोजगार छिन गया है। वर्षों से चल रहे ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। ऐसे में उनको संचालन से बाहर कर दिया जाएगा।
ई-रिक्शा को प्रदेश में विधिवत स्वीकृति मिल गई है। अब यह मोटर व्हीकल एक्ट में आ गए हैं। बुधवार को कमिश्नर ने ई-रिक्शा संचालन को विधिवत स्वीकृति प्रदान कर दी। परिवहन विभाग ने इनकेसंचालन का अपेक्षित रूट प्लान भी कमिश्नर की मीटिंग में रख गया।
रूट प्लान के अनुसार केवल 250 ई-रिक्शा का संचालन कराया जाएगा। पांच हजार ई-रिक्शा चालक बेकार हो गए हैं। अब इनके ई-रिक्शा अवैध वाहन हो गए हैं। एआरटीओ प्रवर्तन शेर सिंह यादव ने बताया कि ई-रिक्शा केसंचालन के साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि जाम न लगने पाए और लोगों को ज्यादा रूट पर सवारी भी मिल सकें।
इसके लिए केवल 250 ई-रिक्शा की जरूरत है। केवल इनको ही स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इनकेअलावा अन्य ई-रिक्शा को संचालन से बाहर किया जाएगा। पुराने ई-रिक्शा केपास कंपनी का अनुमति पत्र जब तक नहीं होगा, उनका पंजीकरण संभव नहीं है।