आरोप है कि पुलिस ने सोनू के भाई सुनील को हिरासत में लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। इसके अलावा युवती के परिजनों ने अपहरण के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहीं, युवती के पिता समेत आठ लोग लगातार सोनू के परिवार का मानसिक शोषण कर रहे थे। इस संबंध में उन्होंने पुलिस को अवगत कराया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पुलिस ने नौ दिसंबर 2020 को सोनू और युवती को बागपत जिले के नैथला गांव से बरामद कर लिया था। सोनू को पुलिस ने दो दिन तक थाने में ही रखा। इसके बाद 11 दिसंबर की रात को युवती के परिजनों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी गई। किसी को जानकारी न हो, इसके लिए पुलिस ने सोनू का पोस्टमार्टम न होने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
आरोप है कि थाना पुलिस ने सोनू के ताऊ के बेटे पर दबाव बनाकर एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और शव को कनैनी गांव में लाकर जला दिया, जिसके बाद पुलिस की गलत कार्रवाई और बेटे की मौत के बाद सुरेश देवी ने साल 2021 मे हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें न्यायालय ने एसीजेएम प्रथम को इस मामले में जांच के आदेश दिए, जिसमें पाया गया कि पुलिस कस्टडी में ही सोनू की हत्या की गई है।
इसको लेकर 25 मार्च 2022 को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव से इस मामले में कार्रवाई का ब्योरा मांगा। इसके बाद 29 मार्च 2022 को एसएसपी से मृतक सोनू की मां सुरेश देवी ने मामले में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की, जिसके आधार पर मंगलवार रात थाना पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी मिथलेश उपाध्याय, उप निरीक्षक बहादुर सिंह, उप निरीक्षक रामसेवक सहित गांव शहजादपुर कनैनी निवासी अनिल चौधरी, जगदीश चौधरी, विनित, मनीष उर्फ बैगन, राजीव, प्रद्युमन, सत्यप्रकाश और मुकेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
एसीजेएम की रिपोर्ट के बाद भी नहीं हुई थी कार्रवाई
हाईकोर्ट के आदेश पर बुलंदशहर न्यायालय के एसीजेएम ने जांच की, जिसमें पुलिस कर्मी दोषी पाए गए थे, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्च न्यायालय द्वारा कार्रवाई का ब्योरा मांगे जाने पर शासन स्तर से कार्रवाई की गई है।
हार गए आरोपी, जीत गई मां
सोनू की मां सुरेश देवी पिछले 15 महीने से इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रही थीं। बेटे के प्रेम प्रसंग के बाद आरोपी पक्ष के लोग लगातार पीड़ित परिवार को प्रताड़ित कर रहे थे। बेटे की मौत के बाद भी आरोपी उनको लगातार परेशान कर रहे थे, लेकिन पीड़िता ने हार नहीं मानी। थाना नहीं तो एसएसपी, एसएसपी नहीं तो जिला न्यायालय और वहां भी इंसाफ नहीं मिला तो उच्च न्यायालय में गुहार लगाई।
मामले में जांच के दौरान थाना पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में नजर आई है। इसी के चलते तत्कालीन थाना प्रभारी, दो उपनिरीक्षक समेत 11 आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
- सुरेंद्र नाथ तिवारी, एसपी सिटी