बुलंदशहर के शिकारपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 10 जुलाई 2020 को दो वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने वाले पड़ोसी प्रेमपाल को कोर्ट ने दोषी माना है। एडीजे पॉक्सो पल्लवी अग्रवाल की कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाते हुए उस पर 1.40 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने अर्थंड की राशि मृत बच्ची के परिजनों को देने का आदेश दिया है। मामले में पुलिस ने 11 दिन में चार्जशीट लगाई और कोर्ट ने 16 माह में आरोपी को सजा सुना दी है।
सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि भारतीय संस्कृति में छोटी बच्चियों की पूजा की जाती है। कन्या को पूजने वाली आर उनसे आशीर्वाद लेने वाली संस्कृति में दो वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर तड़पा तड़पा कर हत्या की जाए तो यह समाज के लिए घातक है और समाज को विकृत दिशा देने का कार्य है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह किसी अंजान व्यक्ति ने सुनसान जगह पर वारदात को अंजाम नहीं दिया है। अभियुक्त पीडि़ता के घर के सामने का रहने वाला है और पांच बच्चों का पिता है। कोई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में किसी भी रिश्ते में भरोसा नहीं कर पाएगा। इस प्रकार का व्यक्ति मानसिक रूप से घृणित और समाज में रहने योग्य नहीं है। इस प्रकार का कृत्य विधि के साथ ही मानवता को शर्मसार करने वाला और सामजिक ढांचे को नष्ट कर देने वाला अपराध है। वहीं, कोर्ट के निर्णय को बच्ची के परिजनों ने न्याय की जीत बताया है। उच्च न्यायालय और अन्य अपीलीय अधिकारियों से दोषी पर रहम न बरतने की मांग की है।
यह था मामला
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो भरत शर्मा ने बताया कि 10 जुलाई 2020 को शिकारपुर क्षेत्र के एक गांव निवासी पीडि़त पिता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसकी दो वर्षीय बच्ची घर के पास खेलते समय गायब हो गई। बच्ची का जब कोई सुराग नहीं लगा तो परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले प्रेम सिंह पर बच्ची के अपहरण और हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपी को अंतिम बार बच्ची के साथ तालाब की ओर जाते देखा गया था। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो आरोपी ने स्वीकार किया था कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म कर बेहोशी की हालत में उसे तालाब में फेंक दिया था।
इनके हुए बयान हुए दर्ज
कोर्ट में पीड़ित परिजनों के साथ ही प्रत्यक्षदर्शी आकाश शर्मा, अरुण शर्मा, नरेश कुमार, राकेश गिरी, पोस्टमार्टम करने वाली चिकित्सक डॉ. सरिता यादव, प्रारंभिक विवेचक उप निरीक्षक सुखपाल सिंह, प्रभारी निरीक्षक उमेश कुमार पांडेय और क्लर्क सुनील कुमार के बयान दर्ज किए गए थे।