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सुविधाओं के साथ ही बदलेगा वसुंधरा की जमीन का लैंडयूज

Thu, 21 Apr 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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ग्रीन लैंड
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आवास विकास परिषद की वसुंधरा योजना के सेक्टर सात और आठ की करीब 102 एकड़ जमीन का लैंडयूज सामुदायिक सुविधाओं के साथ ही मिक्स्ड में बदला जाएगा। जीडीए अधिकारियों ने लैंडयूज बदलने संबंधी रिपोर्ट शासन को भेजी है। रिपोर्ट में लैंडयूज बदलने के संबंध में आईं आपत्तियों की सूची को भी शामिल किया गया है।
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अधिकारियों के मुताबिक आपत्तियों के बिंदुओं का समाधान होने पर ही लैंडयूज बदलेगा। जीडीए की 139वीं बोर्ड बैठक में सेक्टर सात की संस्थागत लैंडयूज और सेक्टर आठ की आवास एवं उपनगर केंद्र लैंडयूज वाली जमीन को मिक्स्ड लैंडयूड में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी।

जीडीए ने प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजा था। बीते वर्ष शासन ने जीडीए को नियमानुसार लैंडयूज बदलने से पहले जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगने के निर्देश दिए थे। लैंडयूज बदलाव पर 16 संस्थाओं ने आपत्तियां दी थीं।
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जीडीए सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने बताया कि लैंडयूज बदलने पर नक्शे पास करने के दौरान सामुदायिक सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। यानी घर या दुकान बनाने के साथ स्कूल, शिक्षण केंद्र आदि का भी प्रावधान करना होगा।

नदी किनारे लैंडयूज चेंज का प्रस्ताव सिंचाई विभाग के पाले में
गाजियाबाद। नदी संरक्षित क्षेत्र के लैंडयूज बदलाव पर अधिकारियों ने गेंद सिंचाई विभाग के पाले में डाल दी है। मंगलवार को जीडीए बोर्ड बैठक में नए सिरे से लैंडयूज चेंज का प्रस्ताव रखने वाले अधिकारियों ने शासन को भेजी रिपोर्ट में न तो लैंडयूज चेंज करने पर सहमति दी है और न ही मना किया है।

हिंडन किनारे अर्थला और कनावनी की जमीन पर लैंडयूज चेंज करने के लिए एक सपा नेता और पुलिस अधिकारी ने आवेदन कर रखा है। जीडीए की बीती बोर्ड बैठक में हिंडन नदी के किनारे अर्थला और कनावनी गांव की जमीन का लैंडयूज ग्रुप हाउसिंग और कामर्शियल करने के प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से एक प्रस्ताव एक सपा नेता और एक पुलिस अधिकारी का है। बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सहमति न मिलने पर इसे स्थगित कर दिया गया था।

बाद में प्रस्ताव की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में शामिल अफसर लैंडयूज चेंज पर सहमत नहीं हो पा रहे थे। अफसरों की एक टीम का मानना था कि यदि सिंचाई विभाग ने एनओसी दे दी है तो लैंडयूज चेंज करने में कोई आपत्ति नहीं है।

अन्य अफसरों के मुताबिक इस प्रस्ताव से यदि मास्टर प्लान में चेंज करना होगा तो इसे पास न करना बेहतर रहेगा। लंबे समय के मंथन के बाद अधिकारियों ने प्रस्ताव को रद्द कर दिया था। दबाव में जीडीए अधिकारियों ने फिर प्रस्ताव को शासन के पास भेज दिया है। इसमें शासनादेश का हवाला देते हुए सिंचाई विभाग से नदी किनारे निर्माण के लिए पी-लाइन तय करने, बंधे निर्माण का परीक्षण कराने के बाद लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव रखा गया है।
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