देश को एक और महामारी से निजात दिलाने के लिए बिबकोल अहम भूमिका निभाएगा। पहले पोलिया और अब हैजा की बीमारी से निजात दिलाने के लिए बिबकोल में कोलरा नामक वैक्सीन के फॉर्मूले का सफल परीक्षण किया गया है। वैक्सीन बनाने के लिए अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय औरविश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम आगे की प्रक्रिया के लिए कंपनी का निरीक्षण करेगी।
चोला के औद्योगिक क्षेत्र स्थित भारत इम्युनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बिबकोल) की स्थापना वर्ष 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। कंपनी की स्थापना के समय देश से पोलियो नामक महामारी के खात्मे के लिए वैक्सीन उत्पादन का कार्य सौंपा गया था।
स्थापना के बाद से अब तक कंपनी ओपीवी (ओरल पोलियो वैक्सीन) की 12.5 करोड़ से अधिक खुराक तैयार कर चुकी है। अब सरकार ने कंपनी को कोलरा वैक्सीन बनाने का जिम्मा सौंपा है। वैक्सीन बनाने के पहले लैब बनाने, उपकरण खरीदने के लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया है।
बिबकोल के एमडी डॉ. संजय मिश्रा के निर्देशन में 20 सदस्यीय टीम ने वैक्सीन के लिए कार्य शुरू कर दिया है। सरकार के निर्देश पर बिबकोल ने सबसे पहले वैक्सीन का फॉर्मूला बनाया है। अधिकारियों के मुताबिक अभी कंपनी में लैब बनाने के लिए और बजट सरकार जारी करेगी।