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550 दुकानें, 20 हजार ग्राहक, टॉयलेट एक भी नहीं

Fri, 22 Apr 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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toilet - फोटो : अमर उजाला
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 स्वच्छ भारत मिशन और क्लीन सिटी अभियान को भी नगर निगम परवान नहीं चढ़ा पा रहा। सालाना 600 करोड़ बजट वाला निगम शहर में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दे पा रहा।
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निगम शहर के उन प्रमुख बाजारों में भी पब्लिक टॉयलेट नहीं बनवा पाया है, जिनमें गाजियाबाद ही नहीं दूसरे शहरों से भी ग्राहक बड़ी संख्या में आते हैं। महिलाओं का बाजार कहा जाने वाला तुराबनगर इनमें से एक है।

25 साल पुराने इस बाजार में कुल 550 दुकानें हैं और रोजाना करीब 20 हजार ग्राहक आते हैं लेकिन हैरत की बात यह है कि पूरे बाजार में नगर निगम आज तक एक पब्लिक टॉयलेट तक नहीं बनवा सका है।
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स्वच्छता अभियान का सच मुहिम के तहत ‘अमर उजाला’ ने तुराबनगर बाजार व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता की तो उनका दर्द छलक पड़ा।

यूरिनल पर दुकानदारों का कब्जा
तुराबनगर मार्केट के बैक साइड में बनी सब्जी मंडी में निगम ने यूरिनल बनाया था। इस पर भी दुकानदारों ने कब्जा कर लिया है। इस यूरिनल को बंद कर कुछ दुकानदारों ने इसे गोदाम बना दिया है।

उधर, घंटाघर के पास कन्या वैदिक स्कूल की दीवार से सटे पब्लिक टॉयलेट को निगम ने लाखों रुपये की लागत से बनाया था। करीब तीन साल पहले बने शौचालय को संचालित नहीं किया गया। इसमें गेट तक नहीं लगाए गए।

ऐसे में महिलाएं इसका भी इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। अब इस पर भी दुकानदारों ने कब्जा कर लिया। इसे बंद कर बाहर अस्थायी दुकान लगा ली गई हैं।

बाजार में टॉयलेट बनवाने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है। निगम अधिकारी इसके लिए पैसा खर्च करने को तैयार नहीं है। अगर निगम टॉयलेट भी नहीं बनवा पा रहा तो स्वच्छता अभियान चलाना बेकार है।
- सुभाष छाबड़ा, अध्यक्ष तुराबनगर व्यापार मंडल

प्रधानमंत्री देश भर में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं लेकिन गाजियाबाद शहर में यह अभियान सिर्फ कागजों में चल रहा है। तुराबनगर ही नहीं शहर में कहीं भी टॉयलेट नहीं बनाए हैं। शौचालय न होने से दुकानदार व ग्राहकों को बहुत परेशानी होती है।
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- रजनीश बंसल, वरिष्ठ व्यापारी नेता
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