उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने क्रेडिट कार्ड पर बोनस प्वाइंट देने के नाम पर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बिहार निवासी दीपक कुमार (25) और रत्नेश (24) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, 17 सिमकार्ड, दो लैपटॉप, तीन आधार कार्ड, सात बैंक अकाउंट, 18 क्रेडिट कार्ड व अन्य सामान बरामद किया है।
शुरुआती जांच के बाद पुलिस को पता चला है कि आरोपी पिछले करीब एक साल में सैकड़ों लोगों को इसी तरह चूना लगा चुके हैं। दोनों बेहद शातिर तरीके से पीड़ितों के कार्ड की जानकारी जुटाकर उसमें सेंध लगा लिया करते थे। पकड़े गए दोनों आरोपी ग्रेजुएट हैं। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामल की छानबीन कर रही है।
उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि तीन जनवरी 2022 को गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पार्टल से उनकी टीम को ठगी की एक शिकायत मिली थी। सिविल लाइंस, दिल्ली निवासी शिकायतकर्ता हेतराम ने बताया कि उनका क्रेडिट कार्ड उनकी जेब में था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में उनके कार्ड से 44 हजार रुपये निकाल लिये। उनके पास न तो कोई ओटीपी आया और न ही उन्होंने कार्ड की जानकारी किसी को दी।
सूचना के बाद फौरन जिले के साइबर थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई। एसआई रोहित सारसवत व अन्यों की टीम ने टेक्नीकल सर्विलांस से पड़ताल शुरू की। पीड़ित के कार्ड से जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए उनका पता किया गया। इसके अलावा आरोपियों की सीडीआर डिटेल्स से पुलिस को पता चला कि आरोपी नजफगढ़ इलाके में कहीं मौजूद हैं।
कार्ड से खरीदारी करने के बाद जिन पतों पर सामान डिलीवर हुआ था, उसका भी पता किया गया। इस दौरान टीम को पता चला कि आरोपी शुक्रवार देर रात सोनीपत के मुर्थल में परांठे खाने के लिए जाएंगे। वहां से उन्होंने अपने एक जानकार को कैब भेजने के लिए कहा। एसआई रोहित सारसवत ने फौरन एसआई गुमन सिंह को कैब ड्राइवर बनाकर मुर्थल भेजा। देर रात करीब दो बजे आरोपी गुमन की कैब में सवार हुए। गुमन उनको दिल्ली ले आया। यहां पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों का पता चला। उनको भी बरामद कर लिया। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दोनों पिछले करीब एक साल से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम...
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि दोनों क्रेडिट कार्ड धारकों का कुछ डाटा जुटा लेते थे। इसके बाद बैंक का कर्मचारी बनकर ग्राहकों को कॉल किया जाता था। पीड़ितों को क्रेडिट कार्ड के बोनस प्वाइंट देने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद पीड़ितों के कार्ड का नंबर, उसकी एक्सपायरी, सीवीवी नंबर पूछकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता था।