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Delhi: डीडीए में फ्लैट बुक करने के नाम पर करोड़ों की ठगी, जालसाज बिहार से जबकि सरगना दिल्ली से गिरफ्तार

Thu, 08 Jun 2023 07:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली

सार

गिरफ्तार जालसाजों की पहचान नालंदा बिहार निवासी राजा पटेल और शेखपुरा, बिहार निवासी सोनू के रूप में हुई है। रोहिणी निवासी विशाल अग्रवाल ने 23 मार्च को एनसीआरपी पोर्टल पर ठगी की शिकायत की।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रोहिणी जिला साइबर सेल ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) में फ्लैट बुक करने के नाम पर ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी को अंजाम दे रहे थे। इनके कब्जे से पुलिस ने 4 लाख रुपये, 15 मोबाइल फोन, 13 डेबिट कार्ड, 45 सिम कार्ड, डोंगल और एक लैपटॉप बरामद किए हैं। लैपटॉप का इस्तेमाल आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाने और डाटा एकत्र करने के लिए कर रहे थे।

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गिरफ्तार जालसाजों की पहचान नालंदा बिहार निवासी राजा पटेल और शेखपुरा, बिहार निवासी सोनू के रूप में हुई है। रोहिणी निवासी विशाल अग्रवाल ने 23 मार्च को एनसीआरपी पोर्टल पर ठगी की शिकायत की। जिसमें बताया कि वह गूगल पर डीडीए फ्लैट्स की जानकारी हासिल कर रहा था। जहां एक वेबसाइट का लिंक मिला। जिसमें पहले आओ पहले पाओ के आधार पर डीडीए फ्लैटों के लिए बुकिंग खुली थी। जिसमें आवेदन शुल्क के लिए 75 हजार और एनओसी के लिए 25 हजार की मांग की गई थी। पीड़ित ने यूपीए के माध्यम से उसमें दिए बैंक खाते में पैसे और अपने व्यक्तिगत दस्तावेज जैसे फोटोग्राफ, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पता और अपना मोबाइल नंबर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। अगले दिन पीड़ित के पास एक मोबाइल नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने उनसे 4 लाख रुपये जमा करने को कहा। नहीं तो आवेदन खारिज करने की बात कही। पीड़ित को ठगी का अहसास होने पर उसने शिकायत कर दी।

निरीक्षक अजय दलाल और देवेंद्र के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। आरोपियों के नंबर और बैंक खातों की जांच में पता चला कि गिरोह कोलकाता, मुंबई और बिहार से संचालित हो रहा है। तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस टीम ने बिहार के शेखपुरा से सोनू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह ठगी करने वालों को बैंक खाता और सिम कार्ड मुहैया कराता था। साथ ही पैसे ट्रांसफर करने में मदद करता था। उसने बताया कि वह अपने गांव के तीन चार लोगों के जौनपुर और मुंबई के बैंक खाते और सिम कार्ड ठगों को प्रदान किया था। उसने यह भी खुलासा किया कि वह खातों के नेट बैंकिंग एटीएम कार्ड, खाताधारक के आधार कार्ड की कॉपी और खाते से जुड़े सिम कार्ड अपने पास रखता था। उसने बताया कि अपराध में इस्तेमाल सिम कार्ड उसने ही उपलब्ध कराया था। पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड और एक लाख रुपये बरामद किया। जांच में पता चला कि सोनू ने ठगों को सौ से ज्यादा सिम कार्ड दे चुका है।

उसके बाद पुलिस ने ठगी के मास्टरमाइंड की तलाश शुरू की। तकनीकी जांच से पता चला कि अपराध में शामिल एक व्यक्ति 23 मई को कोलकाता से दिल्ली आया था और पश्चिमी दिल्ली में स्थित विभिन्न एटीएम से पैसे निकाल रहा था। पुलिस टीमों को पश्चिमी दिल्ली में एटीएम बूथों पर कड़ी निगरानी रखी और सीसीटीवी कैमरे से एटीएम से पैसे निकालने वाले की पहचान की। तकनीकी जांच में आरोपी के तिलक नगर इलाके में होने की जानकारी मिली। जिसे पुलिस ने एक पार्क से उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था। उसकी पहचान नालंदा बिहार निवासी राजा पटेल के रूप में हुई। उसके लैपटॉप की जांच में 20 से अधिक फर्जी वेबसाइटों के डोमेन मिला। उसने बताया कि वह यूट्यूब से वेबसाइट डेवलप करना सीखा था।

दूसरे के लिए फर्जी वेबसाइट बनाते बना जालसाज
राजा पटेल ने बताया कि साल 2018 में उसने सोहो सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के नाम से सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की। वह अपने ग्राहक के लिए वेबसाइट डेवलप करने लगा। फरवरी 2022 में श्याम नामक व्यक्ति उनके पास आया और साइबर ठगी में शामिल व्यक्तियों के लिए सरकारी योजनाओं की वेबसाइट विकसित करने को कहा। वेबसाइट विकसित करने के लिए उसे अच्छी रकम मिली। जल्दी पैसा कमाने के लिए उसने उनके लिए वेबसाइट बनाना शुरू कर दिया। वह उनसे गूगल पर विज्ञापन चलाने के लिए पैसे भी लेने लगा। उसे पता चला कि उसके विकसित वेबसाइट का इस्तेमाल कर लोग करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। इसके बाद उसने साइबर ठगी करने का फैसला किया।

 

फरवरी 2023 में उसने देखा कि गूगल पर डीडीए फ्लैट्स की करीब दो सौ से ढ़ाई सौ लोगों ने तलाश की है। यहां से उसे डीडीए की फर्जी वेबसाइट बनाकर पैसे कमाने का आइडिया आया। उसने श्याम को इसमें शामिल किया। उसके जरिए सिम कार्ड और बैंक खाते का इंतजाम किया। शुरुआत में उसने डीडीए की मूल वेबसाइट से मिलता जुलता नकली वेबसाइट www.ddaflat.org.in विकसित की। 

नकली वेबसाइट पर अधिक लोगों को आकर्षित करने के लिए गूगल पर विज्ञापन देना शुरू कर दिया। जिससे रोजाना 50 से अधिक ग्राहक आने जाने लगे और रोजना करीब 10-15 रजिस्ट्रेशन होने लगे। वह उनसे फोनपे के क्यूआर कोड और फर्जी खातों से लिंक के जरिए भुगतान लेने लगा। वह हर दो तीन दिन में क्यूआर कोड बदल देता था, ताकि उसका पता नहीं लगाया जा सके।

सरगना पत्नी के नाम से चला रहा था तीन कंपनी
जालसाज से पूछताछ में पता चला कि वह डीडीए के तीन और जालसाजों के लिए 15 से अधिक फर्जी वेबसाइट बना चुका है। उनसे बताया कि फर्जी वेबसाइट के साथ साथ वह अपनी पत्नी के नाम पर तीन कंपनियां चलाता है। उसने अपनी पत्नी के नाम पर स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ ईयर फोन और पावर बैंक आदि का अपना ब्रांड भी लॉन्च किया है। उसने बताया कि ठगी की रकम को वह अलग-अलग शहरों में स्थित एटीएम से निकालता था। वह फ्लाइट में यात्रा करता था और फ्लाइट में अपने साथ बड़ी मात्रा में पैसा ले जाना संभव नहीं था, इसलिए वह श्याम को पैसे देकर उसे ट्रेन के माध्यम से कोलकाता स्थानांतरित करवाता था। उसने बताया कि वह पैसे निकालने के लिए दिल्ली आया था। 

 

पुलिस ने उसकी निशानदेही पर 13 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 13 एटीएम और डेबिट कार्ड और  तीन लाख नकद बरामद किए। उसके लैपटॉप में मौजूद आंकड़ों की जांच में पता चला है कि आरोपी ने एक हजार से अधिक लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुका है। पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ 60 से अधिक शिकायतकर्ता ने शिकायत दी गई है। पुलिस ने बताया कि राजा पटेल 12 वीं पास है। जबकि सोनू कुमार मगध विश्वविद्यालय से बीएससी फिजिक्स (ऑनर्स) किया हुआ है। वह पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, लेकिन अपने पिता की मृत्यु के बाद गांव लौट आया। जहां उसने छोटे लड़कों को खाता और सिम के साथ धोखा देकर पैसा कमाते हुए देखा। जल्दी पैसा कमाने के लिए वह जालसाजों को खाते उपलब्ध कराने लगा।

 
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आरोपी के तीन फर्जी वेबसाइट :
www.ddaflat.org.in
www.ddaeauction.in
www.ddahousingyojana.com
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