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Delhi NCR News: 450 करोड़ भूमि घोटाला मामले में एम3एम इंडिया और प्रमोटरों पर धोखाधड़ी का मुकदमा बरकरार

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नोट- गुरुग्राम संस्करण के लिए भी महत्वपूर्ण
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कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं, 31 एकड़ जमीन के सौदे में भुगतान का है विवाद

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
तीस हजारी कोर्ट ने रियल एस्टेट डेवलपर एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल, पंकज बंसल सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आपराधिक मुकदमे को बरकरार रखा है। यह मामला गुरुग्राम में लगभग 31 एकड़ जमीन के कथित 450 करोड़ के भूमि घोटाले से जुड़ा है। जिला जज अंजू बजाज चंदना ने 17 अक्तूबर के आदेश में ट्रायल कोर्ट के 31 जनवरी के उस आदेश को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत संज्ञान लिया गया था।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर धोखाधड़ी के संज्ञान में दखल देने की जरूरत नहीं है। दोनों पक्ष आरोप तय होने के समय मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपनी दलीलें रख सकते हैं। हालांकि, अदालत ने आईपीसी की धारा 406 के तहत संज्ञान को रद कर दिया। आरोपी 27 अक्तूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होंगे और ट्रायल कोर्ट को जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड की शिकायत पर आधारित है। कंपनी का आरोप है कि एम3एम और उसकी समूह कंपनियों ने चाउमा गांव (गुरुग्राम) की करीब 31 एकड़ जमीन के अधिकार बिना पूरा भुगतान किए हासिल कर लिए। नवंबर 2016 में हुए भूमि विनिमय समझौते के तहत चाउमा की जमीन के बदले सोहना के मोहम्मदपुर गुजर गांव की जमीन और 114 करोड़ का भुगतान तय हुआ था।
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इसमें लगभग 16.30 करोड़ का अग्रिम भुगतान हुआ और बाकी 98 करोड़ के पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए। अभियोजन का आरोप है कि चेक दो बार बदले गए, लेकिन मार्च 2018 में स्टॉप-पेमेंट निर्देश के बाद वे बाउंस हो गए। इसके बावजूद आरोपी कंपनियों ने विवादित जमीन के कुछ हिस्से का म्यूटेशन अपने नाम करवा लिया और रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया। एमजीएफ का आरोप है कि आरोपियों ने भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन पूरा नहीं किया, जिससे बिना पूरा पैसा मिले जमीन के अधिकार हस्तांतरित हो गए। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 2022 में एमजीएफ की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी।
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