लगता है बवाना हादसे से पुलिस व अन्य एजेंसियों ने सबक नहीं लिया है। सोमवार तड़के सुल्तानपुरी इलाके में जूता फैक्ट्री में आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस के अलावा दमकल की करीब 10 गाड़ियां मौके पर पहुंची। किसी तरह स्थानीय लोगों की मदद से पहली मंजिल पर फंसे 20 लोगों को बाहर निकाला गया।
करीब सवा दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने फिलहाल फैक्ट्री मालिक विरेश गुप्ता के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। मृतकों की शिनाख्त मोहम्मद रजी (20), मोहम्मद शानू (17), महबूब वारिस (18) और अय्यूब वारिस (17) के रूप में हुई है। सभी गांव अस्मदा, जिला हरदोई उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे।
बाहरी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसा सोमवार सुबह करीब छह बजे राज पार्क स्थित एक जूते की फैक्ट्री में हुआ। करीब 6.30 बजे खबर मिलते ही दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। उस समय फैक्ट्री की पहली मंजिल पर 25 मजदूर सो रहे थे।
तल से लगी आग ने देखते ही देखते पहली व दूसरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। अफरातफरी के बीच फैक्ट्री के पीछे की ओर लगी ग्रिल काटकर 20 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन पहली मंजिल के एक कमरे में चार मजदूर फंस गए।
आग पर किसी तरह 9.50 बजे काबू पा लिया गया। चारों मजदूरों को संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां चारों को मृत घोषित कर दिया गया। शुरुआती जांच के बाद पुलिस अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि शार्ट सर्किट की वजह से आग लगी।
फिलहाल क्राइम टीम के अलावा एफएसएल की टीम आग के सही कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि रिहायशी इलाके में जूता फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी।
जूते का ऊपरी हिस्सा तैयार होता था
पुलिस ने बताया कि जिस फैक्ट्री में आग लगी वहां जूते का ऊपरी हिस्सा बनता था। यहां 30 से 35 लोग काम करते हैं। तीन मंजिला फैक्ट्री 150 गज में बनी हुई है। फैक्ट्री के मालिक का नाम विरेश गुप्ता है। वह फैक्ट्री के पास ही रहता है। यहां काम करने वाले मोहम्मद अली ने बताया कि तीनों मंजिलों में काम होता था। ज्यादातर मजदूर काम करने के बाद पहली मंजिल पर रहते थे।
धुएं और आग की लपटों की वजह से फंसे
मोहम्मद अली ने बताया कि आग भूतल से शुरू हुई। लेकिन जब तक आग लगने की जानकारी मिली। पहली मंजिल पर धुआं भर गया था। इस वजह से पहली मंजिल पर फंसे मजदूर बाहर निकल नहीं पा रहे थे। वहीं धुएं और आग की लपटों की वजह से बाहर से कोई भी ऊपर की मंजिल पर नहीं पहुंच पा रहा था। बताया जा रहा है कि वहां चार मजदूरों ने बचने के लिए खुद को कमरे में बंद कर लिया था। मोहम्मद अली ने बताया कि हादसे में मारे गए महबूब और अय्यूब सगे भाई थे जबकि रजी व मोहम्मद शानू चाचा-ताऊ के लड़के थे। सभी करीब दो साल से यहां काम कर रहे थे और पहली मंजिल पर एक साथ रहते थे।
संकरी गली में दमकल कर्मियों को हुई दिक्कत
राजपार्क में संकरी गली में फैक्ट्री होने की वजह से दमकलकर्मियों को वहां तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल की गाड़ियों को मेन रोड पर रखकर पाइप को खींचकर गली में ले जाना पड़ा और फिर आग बुझाने का काम शुरू किया गया। इस वजह से आग बुझाने में दो घंटे का समय लग गया।
फैक्ट्री में ज्वलनशील पदार्थ होने का शक
दमकल अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से इमारत में आग लगी है उससे आशंका है कि फैक्ट्री में ज्वलशील पदार्थ रखा हुआ था। इसके अलावा यहां काफी मात्रा में कपड़ा रखा हुआ था। जिससे आग तेजी से फैली। शुरुआती जांच में पता चला है कि गेट के पास लगे बिजली के मीटर में शार्ट सर्किट से आग लगी। उस समय मेन दरवाजा बंद था। कर्मचारियों के लिए बालकनी ही निकलने का एक मात्र रास्ता था। लेकिन धुआं और आग की लपटों के निकलने की वजह से वह बाहर निकल नहीं पाए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। यहां काम करने वाले कर्मचारियों के मुताबिक फैक्ट्री में आग बुझाने वाले तीन सिलेंडर रखे हुए थे। लेकिन अपनी जान बचाने के लिए मची अफरा-तफरी में किसी ने सिलेंडर से आग बुझाने की कोशिश नहीं की।
मृतकों में दो नाबालिग भी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फैक्ट्री में लगी आग में जिस तरह से दो नाबालिगों की मौत का मामला सामने आया है। इससे शक है कि फैक्ट्री में अन्य नाबालिग भी काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ नाबालिगों का बर्थ सर्टिफिकेट मंगाया गया है। अगर वह नाबालिग पाए जाते हैं तो मालिक के खिलाफ बाल मजदूरी का भी मामला चलेगा।