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वो पांच मुद्दे जिन पर केजरीवाल ही करेंगे फैसला

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केजरीवाल बंगलुरू में हैं और आम आदमी पार्टी स्टिंग की गिरफ्त में। यूं तो केजरीवाल अपनी तबियत खराब होने पर इलाज के लिए गए हैं, लेकिन दिल्ली में पार्टी के स्वास्थ्य में भी खासी गिरावट आ गई है।
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ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि जब केजरीवाल अपनी सेहत में सुधार कर दिल्ली वापस आएंगे तो आम आदमी पार्टी की गिरती सेहत में भी सुधार होगा।

आपको बता दें कि क्यों इस तरह की बात निकल कर सामने आ रही है। पार्टी सूत्रों की माने तो केजरीवाल की गैरमौजूदगी में पार्टी तमाम मसलों पर अपना रूख साफ नहीं कर पा रही है।

केजरीवाल आएंगे तो इन मुद्दों पर देंगे जवाब

लगातार मचे बवाल के बाद पार्टी के नेता आशीष खेतान ने अपने बयान पर माफी मांगी जिसमें उन्होंने विधायकों से बात करने की बात को रिअलाइनमेन्ट करार दिया था।

पार्टी पर भीतर और बाहर दोनों तरफ से जमकर हमले हो रहे हैं, लेकिन फिलहाल केजरीवाल के ना होने से इन मुद्दों पर पार्टी अपना रूख साफ नहीं कर पा रही है।

सिसोदिया, संजय सिंह और केजरीवाल तीनों पर ही विवाद पैदा हो गया है, वहीं पार्टी फिलहाल इन मुद्दों पर देखो और इंतजार करो की नीति पर काम कर रही है।

संशय में AAP नहीं कर पा रही है बचाव

स्टिंग ऑपरेशन्स पर पार्टी बचाव तो कर रही है, लेकिन बिन रणनीति के। बिना किसी मजबूत तैयारी के पार्टी ये नहीं समझ पा रही है कि इन पर बेहतर और सटीक जवाब क्या हो सकता है।

केजरीवाल की गैरमौजूदगी में पार्टी नेता योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण के पत्र का भी आप ने कोई जवाब नहीं दिया है। इन दोनों ने आप के कार्यकर्ताओं को संबोधित पत्र लिखा था, जिसमें अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का जवाब दिया।

वैसे तो खुले तौर पर केजरीवाल भी अब तक इन दोनों के खिलाफ कुछ भी बोलने से बचते रहे हैं, लेकिन अब परिस्थिति के आधार पर केजरीवाल को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना होगा।
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ग्यारह सौ से ज्यादा समर्थकों ने उठाए ‘आप’ पर सवाल

समर्थक छूट रहे हैं पार्टी टूट रही है, ऐसे में बड़े लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आप को एक नई रणनीति के तहत काम करना होगा जिसके लिए भी पार्टी केजरीवाल के आने के इंतजार में है।

आपको बता दें की पीएसी से योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण की बेदखली के बाद पार्टी के 11 से ज्यादा समर्थकों ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का फेसबुक पेज इस रोष की पुष्टि करता है।

वैसे तो पार्टी के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने ये भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी को अभी दो साल हुए हैं। वो एक आंदोलन से राजनीतिक पार्टी के बीच के समय में हैं ऐसे में पार्टी इन विवादों से जल्द ही बाहर आएगी।
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