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Delhi Corona: राजधानी में कोरोना के नए वैरिएंट का पहला मामला आया सामने, जीनोम सीक्वेंसिंग में हुई पुष्टि

Wed, 27 Dec 2023 07:57 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

JN One Variant In Delhi: भारत में एक बार फिर कोरोना महामारी तेजी से बढ़ रही है। हर दिन नए नए मामले दर्ज हो रहे हैं। अब दिल्ली ने नए वैरिएंट जेएन.1 की पुष्टि हो चुकी है। 
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दिल्ली कोरोना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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JN One Variant In Delhi: राजधानी में बुधवार को कोरोना के जेएन.1 वेरिएंट का पहला मामला सामने आया है। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए तीन नमूनों में से एक में जेएन.1 और दो में ओमीक्रॉन वेरिएंट का पता चला है। मरीज में नए वैरिएंट के हल्के लक्षण हैं।

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वहीं, बुधवार को नौ नए मामलों के साथ दिल्ली में कोरोना के 35 सक्रिय मरीज हैं, जबकि 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई। हालांकि, अधिकारी मौत की प्राथमिक वजह कोरोना को नहीं मान रहे हैं। युवक दिल्ली का नहीं था। उसे हाल ही में एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया था। उसके अन्य बीमारियां भी थीं।

नमूना जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया है। इधर, स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में नए वेरिएंट का पहला मरीज मिला है। जीनोम सीक्वेंसिंग के जो तीन नमूने भेजे गए थे, उनमें से एक में जेएन.1 संक्रमण मिला है। मरीज में कोरोना के हल्के लक्षण हैं। दिल्लीवालों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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सौरभ भारद्वाज ने कोरोना के हालात पर दी जानकारी
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और आप नेता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि हमने दिल्ली में आरटीपीसीआर परीक्षण को शुरू कर दिया है। हर दिन 250 से 400 आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दिन दिल्ली में दो नए मरीज मिले। फिलहाल, अभी अस्पताल में कुल चार से पांच मरीज भर्ती हैं। अभी तक किसी भी मरीज की संक्रमण की वजह से मौत नहीं हुई है।

देश में तेजी से फैल रहा कोरोना
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे अद्यतन आंकड़ें जारी किए गए। पिछले 24 घंटे में संक्रमण से तीन और लोगों की मौत हुई, जिनमें से दो कर्नाटक और एक गुजरात से है। पांच सितंबर तक मामलों में कमी दर्ज की गई थी। लेकिन ठंड का मौसम आते ही मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोविड-19 का एक नया वैरिएंट सामने आने से भी स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ गई है। 

2020 की शुरुआत में महामारी अपने चरम पर थी, तब हर दिन आने वाले मरीजों की संख्या लाखों में थी। तब से देश भर में लगभग चार वर्षों में 4.5 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। वहीं, 5.3 लाख से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, , बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4.4 करोड़ हो गई है और मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.81 प्रतिशत है। बता दें, मामले की मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है।देश में अब तक कोविड टीकों की 220.67 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।

जीनोम सीक्वेंसिंग क्या है और जरूरी क्यों?
जीनोम यानी किसी जीव में मौजूद आनुवांशिक तत्व। जीनोम सीक्वेंसिंग तकनीक वैज्ञानिकों को वायरस के डीएनए व आरएनए में मौजूद आनुवांशिक सूचनाओं को जानने और परिभाषित करने में मदद करती है। इससे किसी मरीज में मिला वायरस कहां से आया जाना जाता है।

वैज्ञानिक जानने में जुटे हैं कि वायरस फैलते हुए किस प्रकार से विकसित होता है। कोरोना के एक हजार जीनोम विश्व में पहचाने गए हैं। वैज्ञानिकों के पास वायरस की पूरी सीक्वेंसिंग होगी तो महामारी बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी।

ऐसे फैल रहा वायरस
बिल्कुल! वायरस जब भी अपना रूप बदलेगा, उसके जीनोम सीक्वेंस से वैज्ञानिक जान सकेंगे। किसी खास जगह मिला वायरस वहां कैसे और किस व्यक्ति के जरिये आया, उसने अपना रूप कितने समय में और किस व्यक्ति में बदला, यह कुछ ऐसी जानकारियां हैं, जिनके मिलने से वायरस के प्रसार की मात्रा और समय का सही आकलन हो सकता है।

वायरस भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार भी स्वयं को बदलता है, ऐसे में उसके किसी खास स्वरूप के मूल ठिकानों को पता लगाया जा सकता है। जैसे भारत में वायरस चीन से आया या यूरोप से, देश में वह किन जगहों पर पनपा, किन दूसरे क्षेत्रों में, किसके जरिये और कब फैला आदि बातों का पता लगाया जा सकता है।
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लोगों के इलाज में इससे क्या मदद मिलेगी?
जीनोम सीक्वेंस मालूम होने पर एक अनुमान मिल सकता है कि कितने लोगों में, किस खास क्षेत्र में यह वायरस फैला है। केवल पॉजिटिव टेस्ट से मिली मरीजों की संख्या ही नहीं, बल्कि इस अनुमान से आंकी गई संख्या के अनुसार इलाज के लिए पहले से तैयारियां की जा सकती हैं।
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