दिल्ली में राजनीतिक दल दलित वोट बैंक की लड़ाई में कूद गए हैं। एक ओर आम आदमी पार्टी ने एससी और एसटी शाखा का गठन किया तो वहीं भाजपा के सांसद डॉ. उदित राज की अगुवाई में महारैली की गई।
भले ही महारैली में भाजपा का झंडा-बैनर नहीं था, लेकिन पार्टी के केंद्रीय मंत्री समेत तमाम नेता शामिल हुए। इसके अलावा कांग्रेस भी बड़े स्तर पर दलितों की रैली की तैयारी में जुट गई है। दलितों की अगुवाई करने वाले दो पूर्व विधायकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजधानी में 16.8 फीसदी अनुसूचित जाति आबादी है। इस पर 12 सीटें आरक्षित की गई हैं। 2013 के चुनाव में दलित आम आदमी पार्टी की तरफ झुके थे। 12 में से 9 सीटें आप को मिली थीं, जबकि दो भाजपा और एक मात्र सुल्तानपुर माजरा सीट कांग्रेस के खाते में आई थी।
इससे पहले 2008 के चुनाव में आरक्षित 12 सीटों में से कांग्रेस को 9, भाजपा को दो और बसपा को एक सीट मिली थी। इन आरक्षित सीटों के अलावा 21 सीटें ऐसी हैं, जहां दलित आबादी 17-21 फीसदी है। मसलन ये निर्णायक भूमिका में हैं।
दलित वोट बैंक ने निभाई 2013 में निर्णायक भूमिका
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 2013 के चुनाव में पार्टी को जिन 34 सीटों पर 25 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं, उसमें 17 सीटों पर दलित मतदाताओं की आबादी 17 फीसदी से अधिक है। वहीं इसमें मुस्लिम मतदाता बहुल सीटें भी हैं।
यही वजह है कि कांग्रेस दलितों को एकजुट कर अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही है। इसके पीछे पार्टी ने तर्क दिया कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आने पर अनुबंधित कर्मियों को पक्का नहीं कर सकी। वहीं भाजपा के स्वच्छता अभियान में सफाई कर्मचारियों की छुट्टी तक खत्म हो गई है।
जिले और उसमें अनुसूचित जाति आबादी
जिला प्रतिशत
दिल्ली 16.8
उत्तर पश्चिम 19.1
उत्तरी जिला 18.7
उत्तर पूर्वी 16.7
पूर्वी जिला 16.5
नई दिल्ली 23.4
मध्य दिल्ली 24.4
पश्चिम दिल्ली 14.8
दक्षिण पश्चिम 13.9
दक्षिण दिल्ली 15.5
दिल्ली की ये हैं आरक्षित 12 सीटें
सुल्तानपुर माजरा, करोल बाग, गोकलपुरी, मंगोलपुरी, त्रिलोकपुरी, अंबेडकर नगर, मादीपुर, सीमापुरी, देवली, कोंडली, बवाना और पटेल नगर।