फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपनों में भी कुत्तों का भय करता है परेशान

Mon, 08 Feb 2016 08:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक है। बाइक, कार, साइकिल और पैदल चलने वालों के पीछे अक्सर कुत्ते भौंकते-दौड़ते और कई बार उन्हें काटने भी नजर आते हैं। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 170 से 180 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं।
विज्ञापन


इसमें कुत्ता काटने से पीड़ित नए रोगियों की संख्या 55 से 60 है। 10 से 15 रोगी बंदर के काटने के कारण एआरवी लगवाते हैं। ईएसआई और निजी अस्पतालों में रोजाना औसतन 60 से 65 लोगों को एआरवी की पहली डोज लगाई जाती है। पेश है एक रिपोर्ट

गांवों से लेकर सेक्टरों तक कुत्तों की भरमार
नोएडा के गांव से लेकर सेक्टरों तक में लावारिस कुत्तों  की भरमार है। वाहनों के पीछे कुत्ते अक्सर दौड़ लगाते हैं। बड़े ही नहीं बच्चों को भी कुत्ते जख्मी कर देते हैं।
विज्ञापन


विदेशी को कर दिया था जख्मी
तीन माह पहले सेक्टर-36 में एक विदेशी नागरिक को लावारिस कुत्ते ने बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। उसे सेक्टर-11 के मेट्रो अस्पताल में भर्ती किया गया था। यह पहला ऐसा मामला नहीं है। कुत्तों द्वारा लोगों को जख्मी करने और अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने के आए दिन मामले सामने आते हैं।

फोनरवा ने कई बार दिया है नोटिस
फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) के अध्यक्ष एनपी सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनीमल्स (एसपीसीए) के अधिकारियों को कुत्तों को पकड़ने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि सुनवाई न करने पर कई बार नोटिस भी दिया है लेकिन एसपीसीए कुत्तों को पकड़ने या इनकी संख्या काबू करने के तरीकों पर प्रयास नहीं कर रहा है। लोग कुत्तों से हमेशा दहशत में रहते हैं।

क्या कहती हैं एसपीसीए के पदाधिकारी
एसपीसीए की पदाधिकारी विधि शुक्ला का कहना है कि हर माह करीब 200 से 230 लावारिस कुत्तों की नसबंदी की जाती है। साथ ही इन कुत्तों को रेबीज से बचाने के लिए वैक्सीन भी लगाई जाती है। इसके बाद इन्हें छोड़ दिया जाता है। रोजाना औसतन पांच से छह लोग कुत्ता काटने की शिकायत करते हैं।

लोगों की शिकायत के आधार पर इन कुत्तों को भी वैक्सीन लगाई जाती है और इस बात की भी जांच की जाती है कि कुत्ते को रेबीज है या नहीं। इसकी क्लीनिकल जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में लक्षणों के आधार पर जांच संभव होती है। बीते दो साल में रेबीज का कोई मामला नहीं मिला है।

बढ़ती जा रही है संख्या
एआरवी लगवाने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजाना 170 से 180 लोगों को एआरवी लगाई जाती है। कभी-कभी यह संख्या 200 तक भी पहुंच जाती है। इनमें वह लोग भी शामिल हैं, जिन्हें सेकेंड और थर्ड डोज दी जाती है। बंदर काटने से पीड़ित लोगों की संख्या काफी कम होती है। जिला अस्पताल में एआरवी नि:शुल्क लगाई जाती है जबकि बाजार में यह महंगी है। ऐसे में ज्यादातर लोग जिला अस्पताल में ही आते हैं।
डॉ. नागेंद्र मोहन माथुर
सीएमएस, जिला अस्पताल, नोएडा

सात दिन निगरानी का है नियम
कुत्ते ने यदि काट लिया है तो चिकित्सा जगत में नियम है कि कुत्ते की सात दिन तक निगरानी करें। इस अवधि में कुत्ते की यदि मौत हो जाती है तो एआरवी लगवानी चाहिए। अन्यथा इसका कोई लाभ नहीं है। हालांकि इस पर भी तर्क है कि यदि दिल्ली में किसी को कुत्ते ने काटा होगा और वह नोएडा या एनसीआर के किसी और शहर में रहता होगा तो कुत्ते की निगरानी कैसे होगी।
डॉ. रेनू अग्रवाल
वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल

एसपीसीए के इस नंबर पर कर सकते हैं संपर्क
कुत्ते की नसबंदी और उसकी रेबीज जांच को लेकर एसपीसीए के इस नंबर 9818085256 पर संपर्क कर सकते हैं।

लावारिश कुत्तों की रोकथाम के लिए एजेंसी बदलने की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर खुल चुका है और शीघ्र नई एजेंसी तय कर दी जाएगी, जो शहर में घूम रहे लावारिश कुत्तों से छुटकारा पाने के उपाय करेगी।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें