शनिवार शाम 6.35 बजे पुलिस को डाबड़ी के सीतापुरी इलाके में एक मकान में तीन लोगों के अचेत पड़े होने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद है। दरवाजा तोड़कर पुलिस कमरे में गई। जहां तीन लोग मृत अवस्था में पड़े थे। उनके शव सड़ने शुरु हो गए थे। इस वजह से खून दरवाजे से बाहर बह रहा था। कमरे में गैस का सिलिंडर खुला हुआ था। पास ही खाना पड़ा था। जांच में उनके शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं मिला।
मृतकों की पहचान अमित, उसके भाई सोनू और उनके घरेलू सहायक यादराम उर्फ बब्बन के रूप में हुई। जांच में पता चला कि मूलत: बरेली यूपी निवासी अमित इलाके में रेहड़ी पर छोले भटूरे बेचता था। जांच के बाद पुलिस ने बताया कि तीनों के शव सड़ी-गली अवस्था में मिले हैं। आशंका है कि दो दिन पहले ही दम घुटने या फिर दूषित खाना खाने से मौत हुई है।
पंद्रह दिन पहले छोटे भाई को बुलाया था
सोनू को पता नहीं था कि मौत उसे दिल्ली खींचकर ले आई है। पंद्रह दिन पहले ही अधिक काम का दबाव होने के कारण अमित ने उसे काम में हाथ बंटाने के लिए सोनीपत से दिल्ली बुलाया था। अमित के बड़े भाई राजन राजपूत ने बताया कि उनका परिवार मूलत: बरेली के भुता गांव का रहने वाला है। परिवार में पिता आशाराम, मां मुसा देवी और एक बहन लक्ष्मी है। लक्ष्मी अपने परिवार के साथ सोनीपत में रहती है। सोनू अपनी बहन के साथ ही रहता था।
राजन ने बताया कि अमित एक साल से रेहड़ी पर छोले भटूरे बेच रहा था। पहले वह द्वारका सेक्टर 21 के मार्केट में रेहड़ी लगाता था। एक माह पहले ही वह द्वारका मोड़ पर रेहड़ी लगाना शुरू किया था और पास ही कमरा किराए पर लेकर रह रहा था। कई साल से साथ रहने वाला घरेलू सहायक बब्बन उसके साथ ही रहता था। राजन ने बताया कि काम का दवाब बढ़ने से अमित ने 15 दिन पहले ही काम में हाथ बंटाने के लिए अपने छोटे भाई सोनू को अपने पास बुला लिया था। उसने बताया कि बृहस्पतिवार की रात 11 बजे उनकी अमित से फोन पर बात हुई थी। उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी।