अपने ही गांव में कैदियों की तरह रह रहे थे। अब कुछ राहत मिलने के आसार हैं। कुछ किसानों ने जाना शुरू भी कर दिया है।
-विनोद, सिंघु बॉर्डर निवासी
गांव से आने-जाने पर महिलाओं को भी विशेष परेशानी होती थी। गांव में बेटी-बहू को आने जाने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता था।
-शीला, सिंघु बॉर्डर निवासी
एक बार माताजी की तबितय बिगड़ गई थी। गांव का रास्ता बंद होने की वजह से काफी परेशानी हुई थी। रास्ता खुलना से अब राहत मिलने की उम्मीद है।
-कृष्णा, सिंधु बॉर्डर
गाजीपुर और टीकरी दोनों ही बॉर्डरों को पार कर झज्जर जाना होता था। आने- जाने में समय की बहुत खपत हो जाती थी। इस वजह से कई बार समय पर नहीं पहुंच पाता था।
-आशीष कुमार, वैशाली
आईटीओ स्थित अपनी दुकान पर प्रतिदिन गाजीपुर बॉर्डर को पार कर आता हूं। रोजाना घंटों जाम से जूझना पड़ता है। इस वजह से समय और गाड़ी के ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। रास्ता खुलने से दोनों की बचत होगी।
-प्रवीण मिश्रा, खोड़ा, गाजियाबाद
गाजियाबाद के पटेल नगर से दिल्ली के आजादपुर जाना होता है। इस वजह से गाजीपुर बॉर्डर पर जूझना पड़ता था। हालांकि, एक तरफ का रास्ता खुलने से थोड़ी राहत मिली थी।
-नवेंद्र चौधरी, पटेल नगर, गाजियाबाद