यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाती लड़कियां
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शहर की यातायात पुलिस सरकार के बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के प्रति शायद गंभीर नहीं है। यातायात पुलिस, जान जोखिम में डाल बिना हेलमेट या तीन सवारियां बैठा कर घूमने वाली नारियों को बचाने के कोई कदम नहीं उठाती या यूं कहें कि नजर बचा कर उन्हें निकल जाने देती है।
इस साल यातायात पुलिस ने अभी तक यातायात नियम का उल्लंघन करने में एक भी महिला दो पहिया चालक का चालान नहीं काटा है। कार्रवाई न होने से महिला चालक संभवता इन नियमों के प्रति जागरूक नहीं हैं। जागरूकता की वजह से महिला चालकों की जान जोखिम में रहती है।
यातायात पुलिस ने इस साल 25 अप्रैल तक बिना हेलमेट बाइक चलाने में 9275, पीछे वाली सवारी बिना हेलमेट बैठने में 6063 और ट्रिपल राइडिंग में 1691 चालान (कुल 17029) काटे। यातायात नियम तोडने वाले यह सभी पुरुष चालक थे।
ट्रैफिक पुलिस को यह नियम तोड़ते कोई भी महिला दो पहिया चालक नहीं मिली। रोड सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के एसके शर्मा कहते हैं कि यातायात नियम महिला पुरुष चालक के लिए समान है तो फिर पुलिस महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है।
हादसा होने पर महिलाओं को भी उतनी ही चोट आ सकती है जितनी कि पुरुष चालक को। सामाजिक कार्यकर्ता विष्णु गोयल का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस के सारे जागरूकता कार्यक्रम और कार्रवाई सिर्फ पुरुष चालकों पर ही नहीं लागू होने चाहिए।