संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। 70 वर्षीय महिला लाजवंती वर्षों पुरानी फुलकारी की कला को आज भी जीवित रखे हुए हैं। फुलकारी कढ़ाई से बने कपड़ों को पर्यटक काफी पसंद कर रहे हैं। पटियाला से सूरजकुंड मेले में आईं लाजवंती को इस कला के लिए 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
लाजवंती ने बताया कि वह देश विभाजन के बाद भारत अपनी नानी के साथ आई थीं। नानी से ही उन्होंने इस कला को सीखा और पटियाला में बसने के बाद कला को संजाेने का काम किया। नानी को सूती और सिल्क के कपड़े पर चटकीले रंग-बिरंगे धागे से फूल बनाते देखा करती थी। उन्हीं को देखकर लाजवंती ने पांच साल की उम्र में ही हाथ में क्रोशिया थाम लिया। उसके बाद वह भी नानी के साथ कपड़ों को फुलकारी करने लगी। उसी कला को जीवंत बनाए रखने के उनके काम को पंजाब सरकार और केंद्र सरकार ने भी सराहा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने जहां अवार्ड दिया, वहीं लाजवंती ने वर्ष 1993 में नेशनल अवार्ड जीता और 2021 में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित होने का गौरव हासिल किया।