औद्योगिक नगरी होने के चलते जिले में रहते हैं कई प्रदेशों के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। होली में अब 11 दिन रह गए हैं। ऐसे में सभी ट्रेनों में सीटें फुल हो गईं हैं। जिसके चलते यात्रियों को अब बसों का सहारा लेना पड़ेगा। औद्योगिक नगरी होने के चलते जिले में बिहार और पूर्वांचल के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। होली पर अपने घर जाने के लिए बिहार और पूर्वांचल के विभिन्न शहरों में जाने वाले लोग हर रोज टिकट बुक करवाने के लिए बल्लभगढ़ और फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं।
होली को लेकर महानगरों में रहने वाले लोग अपने-अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। फरीदाबाद में भी भारी संख्या में यूपी-बिहार के लोग रहते हैं। सबसे ज्यादा लोग बिहार की राजधानी पटना के साथ- साथ समस्तीपुर, छपरा, भागलपुर, मधुबनी और दरभंगा आदि शहरों के है। वहीं कुछ लोग यहां पर राजस्थान के श्रीगंगा नगर और कोटा के भी हैं। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे भी लोग थे, जो ग्वालियर, झांसी और भोपाल जाने के लिए टिकट बुक कराने रेलवे स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं। ट्रेनों में सीट फुल होने के चलते स्टेशनों पर टिकट के दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए दलाल एक टिकट की कीमत में दोगुना रुपये वसूल रहे हैं।
बदरपुर बॉर्डर से ले सकते हैं बस
बिहार जाने के लिए बदरपुर बॉर्डर और पल्ला इलाके से निजी बसें जाती हैं। इन बसों में आठ सौ रुपये से 1,500 रुपये तक का किराया होता है। जैसे जैसे होली नजदीक आएगी वैसे वैसे बसों के किराए में भी बदलाव देखने को मिलेगा। इन जगहों से अन्य रूटों के लिए आसानी से बसें मिल जाती हैं। इसके लिए यात्रियों को ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा मिलती है। इन निजी बसों में यात्री बैठने के साथ सोने की भी सीट बुक करवा सकते हैं।
डिपो से मिल जाएगी यूपी के लिए बस
बल्लभगढ़ बस डिपो से हर रोज करीब 50 से अधिक बसें यूपी के विभिन्न जिलों के लिए चलाई जाती हैं। जिसमें अलीगढ़, आगरा, मथुरा, बुलंदशहर आदि रूट शामिल हैं। इसके अलावा हरिद्वार, हमीरपुर, बेजनाथ के लिए भी बसों को रवाना किया जाता है। वहीं अगर किसी को आगरा से आगे एटा, लखनऊ के लिए जाना है तो वह यूपी की रोडवेज बसों में सफर करके एटा तक जा सकते हैं । उसके बाद वहां से लखनऊ और कानपुर की बस ले सकते हैं।
जीआरपी थाना इंचार्ज राजपाल ने बताया कि होली पर अधिकांश लोग गांव लौटते हैं। ऐसे में ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है। टिकट मिलनी मुश्किल हो जाती है। इस दौरान टिकट की कालाबाजारी भी बढ़ जाती है। जिसके चलते उनकी टीम समय समय पर दलालों को रोकने के लिए चेकिंग करती है।