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मेले में दूसरे देशों की संस्कृति से भी रूबरू हो रहे सैलानी

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फरीदाबाद सूरजकुंड मेले में बीन की धून पर नाचते विदेशी कलाकार । - फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट ने शनिवार को सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में बड़ी चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम रिदम ऑफ इंडिया माटी बानी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेले के माध्यम से पर्यटन विभाग का ‘देखो अपना देश’ का नारा चरितार्थ हो रहा है। अपने देश को भी देख रहे हैं और दूसरे देशों की संस्कृति, सभ्यता व कला को भी देखने का मौका मिल रहा है। ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग जल्द ही भजन-कीर्तन जैसी एक सांस्कृतिक रात्रि का भी आयोजन कराएगा। इसमें सभी संस्कृति और धर्म के लोगों को मौका दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि पर्यटन ही एक ऐसा क्षेत्र है, जो विभिन्न संस्कृति को जोड़ता है। हमारी बोली और भाषा भले ही अलग हो, लेकिन हम सबका लक्ष्य एक है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से ‘देखो अपना देश’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ताकि हमारी युवा पीढ़ी हमारे देश को सही तरीके से जान सके। देश में बहुत से ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिनका विशेष सांस्कृतिक महत्व है। इस संस्कृति को जानने के लिए ऐसे आयोजन बहुत जरूरी हैं। मेले के आयोजन पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बधाई दी और कहा कि इस मेले में हरियाणा सरकार ने देश ही नहीं दुनिया को एक बड़ा मौका दिया है। कला एवं संस्कृति के मामले में हरियाणा प्रदेश विश्व स्तर पर मशहूर है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में दुनिया की कला एवं संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच मिलता है। इस मौके पर पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा, पीके सुरेश, डॉ. नीरज कुमार सहित अन्य उपस्थित थे।
‘याद रखना कफन पर जेब नहीं होती’
केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में शायराना अंदाज में दिखे। उन्होंने देश के नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने परिवार को विभिन्न राज्यों के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण जरूर कराएं। शायराना अंदाज में कहा कि ‘तू लाख कमाले हीरे पर मेरी ये बात याद रखना कफन पर जेब नहीं होती’। इस पर दर्शकों ने तालियां बजाकर पर्यटन मंत्री का अभिवादन किया।
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फोटो-13
‘आपणा घर’ में हरियाणवी संस्कृति से रूबरू हो रहे सैलानी
मेले के विरासत द्वारा तैयार किए गए ‘आपणा घर’ में भारत के अलग-अलग राज्यों के लोग हरियाणवी संस्कृति से रू-ब-रू हो रहे हैं। वहीं विदेशी सैलानियों के लिए हरियाणवी पगड़ी आकर्षण का केंद्र है। यहां पर देश के अलग-अलग पगड़ियों के स्वरूप को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ के माध्यम से ‘आपणा घर’ विशेष रूप से चर्चा में है। युवा एवं युवतियां पगड़ी बांधकर सेल्फी ले रही हैं। मेले में 30 से अधिक देशों से भाग लेने वाले प्रतिभागी भी हरियाणवी पगड़ी बंधवा कर सेल्फी ले रहे हैं। विरासत के प्रभारी डॉ. महा सिंह पूनिया बताया कि पगड़ी बांधने वाले विदेशी पर्यटकों में गुयाना, श्रीलंका, अमेरिका ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, बहामास, क्यूबा, बारबाडोस, जमैका, त्रिनिदाद एवं टोबैको आदि देशों के पर्यटक शामिल हैं। वहीं पर्यटन मंत्री ने हरियाणवी पगड़ी बंधवा कर आपणा घर का अवलोकन किया ।
12 सेकेंड में बांध देते हैं पगड़ी
‘आपणा घर’ में पगड़ी बांधने वाले कलाकार अनूप ने महज 12 सेकेंड में पर्यटकों को पगड़ी बांधकर रिकॉर्ड स्थापित किया। उल्लेखनीय है कि अनूप एक ऐसे कलाकार हैं, जो पिछले कई वर्षों से विरासत की ओर से ‘आपणा घर’ में पगड़ी बांध रहे हैं। सूरजकुंड के मेले में उनके पगड़ी बांधने का कोई सानी नहीं है। वे महज 12 सेकेंड में पर्यटकों को पगड़ी बांधकर खूब वाहवाही लूट रहे हैं।
विभिन्न देशों की कला का हो रहा मिलन
सूचना एवं क्रांति के इस युग में विश्व एक ग्लोबल विलेज बन चुका है। ऐसे में विश्व के सभी देशों में कला एवं संस्कृति का भी आदान-प्रदान हो रहा है। इसमें नेपाल का पसमीना शाल, अफगानिस्तान का ड्राई फ्रूट, यूगांडा की लकड़ी की कारीगरी, मलेशिया के कार्क की लकड़ी से बनी वस्तुएं, कजाकिस्तान के परिधान, श्रीलंका के सूट, घाना के वुड क्रॉफ्ट, सूडान की साड़ी, लेबनान के आभूषण, नाइजीरिया के परिधान, ट्यूनीशिया के हैंडबैग, अफगानी गलीचे, सीरिया के स्टॉल आदि हैं।
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