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प्रदूषण की रोकथाम, आधी अधूरी तैयारी

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फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। सर्दी की दस्तक के साथ ही प्रदूषण के स्तर में इजाफा होने लगा है। इस पर रोक लगाने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के निर्देश पर जिले में 15 अक्तूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू करने की तैयार है। अलग-अलग चरणों में परिस्थितियों के अनुसार निपटा जाएगा। हालांकि, तैयारियां आधी अधूरी हैं ऐसे में यह चुनौती बन सकती है।
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हर दिन लगने वाले बिजली कट को रोकने के लिए निगम के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हाई राइज सोसाइटियों में बिजली के नाम जनरेटर की ही सुविधाएं हैं जहां अभी तक कोई फौरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। ग्रेटर फरीदाबाद में करीब 20 परिवारों वाली लगभग 40 से अधिक सोसाइटी जनरेटर जैसी अस्थायी बिजली व्यवस्था के भरोसे हैं। ग्रेप यदि सख्ती से लागू होता है तो यहां की लिफ्ट, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं ठप हो सकती हैं।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग हैं। बिजली जाने पर 95 फीसदी उद्योग डीजल जनरेटर पर चलते हैं। लघु उद्योग भारती के प्रधान रवि भूषण खत्री ने बताया कि डीजी सेट के विकल्प के तौर पर गैस आधारित जनरेटर हैं, मगर इनकी लागत पांच लाख रुपये से शुरू होकर दो करोड़ तक है। ऐसे में नाम मात्र या बड़े उद्योगों में ही यह जनरेटर मौजूद हैं। शेष अन्य सस्ते डीजी सेट के सहारे ही चलते हैं। ग्रेप को लागू करने से कई उद्योग प्रभावित होंगे। इसके लिए जल्दबाजी में कोई विकल्प ढूंढ़ना बेहद मुश्किल है।
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राज्य सरकार की ओर से शनिवार से ही डीजल जनरेटरों पर पाबंदी लगा दी गई थी। शुक्रवार को मुख्य सचिव विजय वर्धन ने हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की बैठक में ये आदेश जारी किए थे। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर 15 अक्तूबर से ग्रेप लागू किया जाएगा, जो 15 मार्च तक लागू रहेगा। गाइडलाइन में साफ तौर पर कहा गया है कि ग्रेप लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां व ढाबों में कोयला व लकड़ी नहीं जलाई जा सकेगी। उद्योगों व शादियों में डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले ईंट-भट्ठे बंद कराए जाएंगे। सरकारी व निजी क्षेत्र के निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। खुले में रखी निर्माण सामग्री को कवर (ढकना) करना जरूरी होगा। सड़कों पर धूल मिट्टी के कणों को पानी का छिड़काव कर उड़ने से रोका जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आदेश को लागू करने के लिए टास्क फोर्स गठित होगी। नगर निगम, हरियाणा विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी टास्क फोर्स के तहत नियमों को सख्ती से लागू कराएंगे।
प्रदूषण रोकथाम के लिए बनाई योजना
फरीदाबाद में ईंट भट्ठे वहीं चलाए जा सकेंगे, जो जिग-जैग तकनीक पर काम करेंगे। हॉट मिक्स प्लांट व स्टोन क्रशर पर धूल न उड़े, इसके उपाय करने होंगे। वायु गुणवत्ता की स्थिति खराब होने से बचाने के लिए इस बार पानी के छिड़काव के साथ ही मैकेनाइज स्वीपिंग जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
अधिकारी बोले
बिजली निगम की ओर से सभी अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में फॉल्ट होने की सूचना मिलने पर उसे तुरंत ठीक किया जाए, जिससे ज्यादा देर बिजली कटौती न हो।
- नरेश कक्कड़, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम
महंगा पड़ता है जनरेटर चलाना
सरकारी स्तर पर बिजली सात रुपये प्रति यूनिट पड़ती है जबकि जनरेटर से बिजली 15 रुपये प्रति यूनिट की खपत होती है। बिजली जाने पर जनरेटर न चलाएं जाएं तो उद्योगों को चार गुना नुकसान होता है। एफआईए के प्रधान बीआर भाटिया ने कहा कि रोजाना फॉल्ट, ब्रेक डाउन और मरम्मत कार्य की वजह से चार से पांच घंटे बिजली कटौती रहती है। बिजली जाने पर पावर मशीन और दवाई बनाने वाले मशीन को दोबारा उसी तापमान पर लाने के लिए करीब एक घंटे इंतजार करना पड़ता है। इससे उत्पादन क्षमता में गिरावट आती है। बार-बार मशीनें बंद और चालू होने से ब्लास्ट का भी खतरा रहता है।
सेहत पर बुरा असर
जनरेटर से निकलने वाले धुएं से दूषित हवा में मौजूद सल्फर डाइआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण सांस लेने में तकलीफ, खांसी, दमा, जल्दी थकावट होने की शिकायत हो जाती है। खासकर जो लंबे समय तक इसके आसपास रहते है।
- डॉ. प्रवीन मलिक, एसोसिएट प्रोफेसर, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
आरडब्ल्यूए पदाधिकारी बोले
ग्रेटर फरीदाबाद की हाइराइज सोसाइटियों में करीब 20 हजार परिवार निवास करते हैं। यहां अधिकांश सोसाइटियों में स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं है। इस कारण जनरेटरों से बिजली दी जाती है। हालांकि, यहां जनरेटर से बिजली 20 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है जबकि सरकारी दर पर 7 रुपये प्रति यूनिट मिलती है। जनरेटर बंद होने से परेशानी बहुत बढ़ जाएगी। 20-20 मंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को पैदल चढ़ना पड़ेगा। बिजली जाने पर लिफ्ट में लोग फंस सकते है। ऐसे में कभी भी बढ़ी दुर्घटना हो सकती है।
- प्रदीप सिवाच, महासचिव, एसआरएस रॉयल हिल्स सोसाइटी
ग्रेप लागू करने से पहले एक सभी विभागों की एक बैठक बुलाई जाएगी। इसमें जिला उपायुक्त के नेतृत्व में एक टास्क फॉर्स का गठन किया जाएगा। यह टीम ईपीसीए की ओर से जारी होने वाले आदेशों की समय-समय पर मॉनिटरिंग करेंगी। जहां-जहां डीजल जनरेटर चलते मिलेंगे उन्हें बंद करवाया जाएगा। निर्माण कार्य और निर्माण सामग्री का उचित प्रबंध नहीं करने पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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- निदेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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