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Faridabad News: मेले में सजीव हो रही द जंगल बुक की दुनिया

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पशु आकृति खिलौने और सजावटी सामान खींच रहा लोगों का ध्यान
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस बार बच्चों से लेकर बड़ों तक को आकर्षित करने वाला एक अनोखा आकर्षण स्टॉल नंबर 1143 पर देखने को मिल रहा है। यहां पहुंचते ही ऐसा अहसास होता है मानो द जंगल बुक की दुनिया सजीव हो उठी हो। बघीरा की शान, शेर खान की दहाड़ और जंगल के अन्य पात्रों की आकृतियां खिलौनों और सजावटी वस्तुओं के रूप में प्रदर्शित की गई हैं, जो मेले में आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।

मेले में मध्यप्रदेश के इंदौर से आए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकार शरीफ खान की रचनात्मकता चर्चा का विषय बनी हुई है। चमड़े, कचरे और अन्य सामग्री से तैयार किए गए पशु आकृति खिलौने और सजावटी सामान उनकी कला और कल्पनाशीलता को दर्शाते हैं। इन कलाकृतियों की जीवंतता के कारण बड़ी संख्या में लोग स्टॉल पर रुककर उन्हें निहार रहे हैं और तस्वीरें खिंचवा रहे हैं।
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पुश्तैनी काम कर रह चौथी पीढ़ी
स्टॉल संचालक शरीफ खान ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी काम है और वे इस परंपरा की चौथी पीढ़ी से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से वह लगातार सूरजकुंड मेले में भाग ले रहे हैं। उनकी स्टॉल पर की गई आकर्षक सजावट और जंगल थीम पर आधारित प्रस्तुति आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। खासतौर पर बच्चों और युवाओं में इन कलाकृतियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने का उत्साह स्पष्ट देखा जा सकता है। शरीफ खान ने बताया कि यहां उपलब्ध हस्तशिल्प और थीम आधारित सजावटी वस्तुएं पर्यटक स्मृति के रूप में अपने साथ ले जा सकते हैं। मेले में आने वाले लोगों के लिए यह स्टॉल न केवल खरीदारी का केंद्र बन रही है, बल्कि कल्पनाशील कला और परंपरा के मेल का एक अनोखा अनुभव भी प्रदान कर रही है।
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