फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। महामारी कोरोना की दो लहर झेलने के बाद सरकार का जोर नागरिक अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने पर है। इसमें उपकरण और ढांचागत सुविधाएं शामिल हैं। ढांचागत सुधार के लिए तीन करोड़ सात लाख का बजट भी हाल ही में पास हुआ है। वहीं, दो करोड़ से ऊपर की लागत से 96 बेड का अस्थाई अस्पताल व एचडीयू-आईसीयू भी नागरिक अस्पताल में तैयार है। इसके साथ ही 25 वेंटिलेटर भी इन दिनों मिले हैं। कुछ माह में कई बड़ी सौगात मिलने के बावजूद मानव संसाधन की कमी के कारण सभी सुविधाएं बौनी नजर आती हैं। अस्पताल प्रबंधन ने पत्र लिख निदेशालय का ध्यान इस ओर दिलाया है। हालांकि, स्टाफ नियुक्ति तक संसाधनों का लाभ जैसे तैसे ही किया जा रहा है।
25 वेंटिलेटर एनेस्थिस्टि के भरोसे हो रहे संचालित
अस्पताल में तैनात विशेषज्ञों ने बताया कि बीके नागरिक अस्पताल में तीन एनेस्थिस्टि हैं। यह आईसीयू में भर्ती वेंटिलेटर मरीज की बेहोशी व हालत का जायजा लेते हैं। इनके अनुसार ही एनेस्थिसिया की डोज तय होती है। वहीं, अन्य विशेषज्ञ मरीज की स्थिति पर नजर रखते हैं। मेडिसिन विभाग का एक भी विशेषज्ञ अस्पताल में तैनात नहीं। पूर्व में एक डॉक्टर मेडिसिन के थे। वह अब पदोन्नत होकर जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में तैनात हैं। वहीं, आईसीयू-एचडीयू के लिए जरूरी इंटेंसिंविस्ट, फिजिशियन, स्टाफ नर्स, ओटीए की भर्ती अटकी हुई है। ऐसे में बेहतर उपकरण भी मानव संसाधन के अभाव में सही से मरीज लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं हो पा रहे।
96 बेड के अस्थाई अस्पताल के संचालन के लिए नहीं हैं लोग
बीके नागरिक अस्पताल में सरकारी मदद से 96 बेड का अस्थाई अस्पताल तैयार किया है। यहां सभी जरूरी फिटिंग, उपकरण, बेड, व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। अब भी अस्पताल को उपचार के लिए नहीं खोला गया है। डॉक्टरों के अनुसार सौ बेड के अस्पताल को चलाने के लिए 20 फिजिशियन, 36 जीडीए, दो फिजियोथैरेपिस्ट, दो पीएमटी, चार ईसीजी कक्ष संचालक व 16 प्रयोगशाला सहायकों की जरूरत होगी। प्रबंधन इसी फेर में है कि बेड है, अस्थाई ढांचा भी है लेकिन, व्यवस्थाएं संभालने के लिए जरूरी मैनपावर नहीं हैं। जो कब तक मिल पाएंगे यह भी तय नहीं है। अस्पताल पीएमओ डॉ. सविता के मुताबिक, जरूरी मैनपावर का मांग पत्र निदेशालय को भेजा गया है।
कम स्टाफ के साथ जूझा अस्पताल
कोविड-19 की दूसरी लहर में 66 आइसोलेशन वार्ड, 11 आईसीयू बेड, 13 बेड इमरजेंसी कक्ष और चार बेड नवजात बच्चों के लिए सिक न्यू बॉर्न बेबी (एसएनसीयू) में आरक्षित किए गए थे। वहीं, छह बेड प्रिजनर वार्ड (बंदी वार्ड) में भी कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किए गए थे। उस समय भी स्टाफ की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बाद में सौ बेड आरक्षित कर दिए गए। उस समय 50 फीसदी डॉक्टर या तो संक्रमित रहे या फिर परिजनों के संक्रमित होने के कारण अस्पताल से दूर क्वारंटीन लीव पर रहे। इस दौरान कुल स्वीकृत सौ नर्स में से मात्र 15 ही सेवा दे रही थीं।
मरीजों के लिए सुविधाएं विकसित की गई हैं। आने वाले कई वर्ष में यह सुविधाएं मिलती लेकिन स्टाफ की कमी है। इसे फिलहाल किसी तरह व्यवस्थित किया जा रहा है। इस बारे में निदेशालय से पत्राचार भी किया गया है। उम्मीद है कि जल्द यह कमी भी दूर होगी।
- डॉ. सविता यादव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल