फरीदाबाद। एंटी करप्शन ब्यूरो ने जिस कार डीलर की शिकायत पर क्राइम ब्रांच की टीम पर केस दर्ज किया है, उसकी मैगपाई होटल के पास गाड़ी ठीक करने की वर्कशॉप है। सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच एनआईटी की टीम ने संचालक उमेश बसवाल को गाड़ियों के साइलेंसर की मिट्टी खरीदने व बेचने के आरोप में हिरासत में लिया था। क्राइम ब्रांच ने उमेश को पूछताछ के बाद छोड़ दिया। इसके बाद भी कुछ पुलिसकर्मी वर्कशॉप में आते-जाते रहे। उमेश ने दुकान के सीसीटीवी में उनकी रिकॉर्डिंग कर ली। पुलिस के झंझट से बचने के लिए कार डीलर ने एक पुलिसकर्मी से संपर्क किया और लेनदेन की बात कर मामला निपटाने की बात कही। केस को निपटाने के दौरान हुई बातचीत को भी संचालक ने रिकॉर्ड कर लिया। एसीबी को दी शिकायत में वर्कशॉप संचालक ने करीब 35 लाख रुपये देने का आरोप लगाया है, जबकि रिकॉर्डिंग में एक लाख दस हजार के लेनदेन की बात हो रही है।
क्या होती है साइलेंसर की मिट्टी
दरअसल साइलेंसर में एक जाली लगी होती है। इसके अंदर लगी एक लेयर को साधारण भाषा में साइलेंसर की मिट्टी कहा जाता है। ये गाड़ी से निकलने वाली खराब गैस को सोख लेती है। जिस कारण प्रदूषण भी कम होता है आवाज भी ज्यादा नहीं होती। ‘मिट्टी की यह नई प्लेट बाजार में 12 से 13 हजार रुपये की आती है। इस प्लेट में प्लेटिनम ( जिसे व्हाइट गोल्ड भी कहा जाता है ) के साथ चांदी लगी होती है। प्रत्येक गाड़ी के साइलेंसर में ये मिट्टी लगी होती है।
दो बार फेल हुई थी एसीबी की रेड
पुलिसकर्मियों की रिकॉर्डिंग के बाद शिकायतकर्ता उमेश ने एसीबी की टीम को मामले से अवगत कराया और टीम को रंगेहाथ पकड़वाने के लिए जाल बिछाया। एसीबी के एक इंस्पेक्टर की अगुवाई में रेडिंग पार्टी तैयार की गई। जैसे ही टीम क्राइम ब्रांच के गेट पर पहुंची मामले की भनक पुलिसकर्मियों को लग गई। मामले की गंभीरता देख ज्यादातर पुलिसकर्मी स्टाफ से निकल लिए। मौके पर मिले पुलिसकर्मी के पास से टीम को कुछ नहीं मिला। इसके बाद एसीबी ने दोबारा से जाल बिछाया लेकिन इस बार भी बात नहीं बनी।
जांच में सामने आएंगे और भी कई नाम
विभागीय जांच में अभी केवल कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। मामले की बारीकी से जांच के बाद कई और नाम सामने आने की उम्मीद है। जिस एंटी करप्शन ब्यूरो को मामले की जांच सौंपी गई है, वहां तैनात कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी इस केस में संदिग्ध मानी जा रही है।