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सूरजकुंड मेला: रीना चंदेल की पपीते की मिठाई का हर कोई दिवाना

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सूरजकुंड मेला
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रीना चंदेल की पपीते की मिठाई का हर कोई दीवाना
फरीदाबाद। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के गांव गागल की रहने वाली रीना चंदेल कभी अपने लिए रोजगार तलाश रही थी। कई जगहों पर अध्यापन कार्य भी किया, लेकिन घर चलाने लायक भी पैसे नहीं मिल पा रहे थे। इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से कच्चे पपीते की मिठाई (पेड़े) बनाने सीखे और न्यू आजीविका सेल्फ हेल्प ग्रुप नाम से महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह खड़ा किया। बस फिर क्या था, रीना के पेड़ों की मिठास ने ऐसा स्वाद बिखरा कि वह आज महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
रीना ने पहली बार अपना स्टॉल लगाया है। रीना चंदेल ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के तहत उन्होंने चार साल पहले काम की शुरुआत की तो आस-पास के आठ किसानों से पपीते के 14 सौ पेड़ लगवाए। आंवले की खेती के लिए भी स्थानीय छोटे किसानों को प्रेरित किया। इसके बाद कच्चे पपीते से पेड़े बनाने के साथ-साथ आंवले की बर्फी भी बनानी शुरू की। जब कच्चे पपीते का सीजन खत्म हुआ तो पके हुए पपीते से भी बर्फी बनाई गई। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं हमीर उत्सव में उनके उत्पादों को लांच कर उन्हें स्थानीय लोगों व महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया था।
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3 क्विंटल से ज्यादा पपीते के पेड़े बिके
मेले में ही तीन क्विंटल से ज्यादा पपीते के पेड़े बिक चुके हैं। उनका कहना है कि इस काम में फिलहाल उनके साथ 35 महिलाएं जुड़ चुकी हैं और प्रत्येक महिला को महीने में 10 से 12 हजार रुपये की आय हो रही है। उन्होंने बताया कि उनके काम को देखते हुए सरकार ने उन्हें स्टार्टअप के तहत 40 लाख रुपये का ऋण प्रदान करने की मंजूरी दी है। इससे उन्हें अपने काम को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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