फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित लिंग्याज विद्यापीठ में 10वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने 750 विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करके नौकरी ढूंढने वाले न बनकर नौकरी देने वाले बनें। विद्यार्थी हमेशा अपनी जड़ों, मूल से जुड़े रहे और अपनी मातृ भाषा का सम्मान करते हुए अपनी पहचान बनाए रखें।
दीक्षांत समारोह का शुभारंभ राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के बाद रोजगार देने वाले बनने का संकल्प लें, तभी देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा शिक्षा नीति में बदलाव करते हुए नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है । हरियाणा में इस नई शिक्षा नीति को 2025 तक लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे हैं। दीक्षांत समारोह में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों में भी लड़कियां ज्यादा रहीं। लड़कियों के आगे बढ़ने से संपूर्ण राष्ट्र आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमारे पास देश को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने का सुनहरा अवसर है। कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने से सफलता अवश्य मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूर ग्रहण करें, लेकिन इसका गुलाम न बनें। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग की छात्रा नैनू वधवा को चांसलर टेकनिकल गोल्ड अवार्ड, स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की दीक्षा को चांसलर नॉन गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया, जबकि 23 को वाइस चांसलर गोल्ड अवार्ड व 6 विद्यार्थियों को वाइस चांसलर कांस्य पुरस्कार दिया गया। स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एवं सोशल साइंस विभाग की विभा प्रकाश को हरिशंकर अवार्ड दिया गया। दीक्षांत समारोह में 750 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियां प्रदान की गई। इनमें से 261 छात्राओं और 489 छात्र शामिल थे। डिप्लोमा की 85, स्नातक की 545 एवं स्नातकोत्तर की 103 डिग्रियां भी प्रदान की गई। इसके अलावा शोधार्थियों को 17 पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पिचेश्वर ने मुख्य अतिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, भारतीय जनता पार्टी के महासचिव रविंद्र राजू, कृष्णा डिस्ट्रिक्ट फैंसिंग एसोसिएशन के चेयरमैन किलारू दिलीप को स्मृति चिह्न, पौधा व शॉल भेंट कर सम्मानित किया। किलारू दिलीप को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी नवाजा गया।